रविवार से शुरू होगी केदारनाथ के कपाट खुलने की प्रक्रिया
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लोकजन टुडे, रुद्रप्रयागः चारधाम धाम यात्रा शुरू होने में अब चंद दिन बचे हैं। केदारनाथ धाम के कपाट खोलने की प्रक्रिया रविवार को शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में भैरवनाथ की पूजा के साथ शुरू हो जाएगी। केदारनाथ धाम के कपाट नौ मई को खोले जाने हैं। यात्रा को लेकर लोगों में खासा उत्घ्साह है। ओंकारेश्वर मंदिर में रविवार देर शाम भ्ौरवनाथ पूजन के साथ विधिवत रूप से केदारनाथ यात्रा की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। लोक मान्यताओं में भैरवनाथ को बाबा केदार का क्षेत्र रक्षक माना गया है। भैरवनाथ पूजन के बाद भैरवनाथ केदारपुरी के लिए रवाना हो जाते है। छह मई को बैंड धुनों के बीच बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली ऊखीमठ से केदारपुरी के लिए रवाना होगी। प्र
थम दिवस जाबरी, विद्यापीठ, विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी, नाला, नारायणकोटी, मैखंडा समेत कई यात्रा पडावों पर भक्तों को दर्शन देने के बाद डोली रात्रि प्रवास के लिए फाटा पहुंचेगी। सात मई को डोली शेरसी, बड़ासू, रामपुर, सीतापुर, सोनप्रयाग होते हुए गौरामाई मंदिर गौरीकुंड में रात्रि विश्राम करेगी। आठ मई को डोली गौरीकुंड से जंगलचट्टी, भीमबली व लिनचोली होते हुए केदारपुरी पहुंचकर भंडारगृह में विराजमान होगी। नौ मई को सुबह 5 बजकर 35 मिनट पर धाम के कपाट खोल दिए जाएंगे।
कभी केदारनाथ यात्रा का प्रमुख पड़ाव रहा गरुड़चट्टी अब फिर से आबाद होगा। केदारनाथ से गरुड़चट्टी तक साढ़े तीन किलोमीटर लंबा और चार मीटर चौड़ा मार्ग बनकर तैयार है। वर्ष 2013 में आई आपदा के बाद से यह चट्टी वीरान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 1985—86 में यहां एक गुफा में साधना की थी। अक्टूबर 2017 में केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्यों के शिलान्यास को पहुंचे प्रधानमंत्री ने भी इस चट्टी को आबाद की इच्छा जताई थी। केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताओं में शुमार है। प्रधानमंत्री कार्यालय समय—समय पर पुनर्निर्माण कार्यों की प्रगति पर रिपोर्ट भी लेता है। आपदा से पहले गौरीकुंड से केदारनाथ जाने वाला पैदल मार्ग रामबाड़ा और गरुड़चट्टी से होकर गुजरता था, लेकिन मंदाकिनी नदी के उफनती लहरों ने रामबाड़ा का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया और इसी के साथ यह रास्ता भी तबाही की भेंट चढ़ गया। वर्ष 2014 से यात्रा का रास्ता बदल दिया गया। इसके बाद यह चट्टी सूनी हो गई। वर्ष 2017 में केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों ने जोर पकड़ा तो गरुड़चट्टी को संवारने की कवायद भी शुरू हुई। अक्टूबर 2018 में रास्ता तैयार कर लिया गया। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि इस मार्ग के निर्माण पर 17 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। केदारनाथ यात्रा में अहम भूमिका निभाने वाले एक हजार से अधिक घोड़ा—खच्चर और दो सौ डंडी—कंडी का पंजीकरण हो चुका है। जिला पंचायत व पशुपालन विभाग की ओर से विभिन्न स्थानों पर शिविर लगाकर यह पंजीकरण किए गए। शनिवार से सोनप्रयाग व गौरीकुंड स्थित पंजीकरण केंद्रों में यह कार्य संपादित किया जाएगा।
केदारनाथ यात्रा नौ मई से शुरू हो रही है। इसके मद्देनजर जिला पंचायत ने सोनप्रयाग व गौरीकुंड में घोड़ा—खच्चर व डंडी—कंडी के लिए पंजीकरण केंद्र बनाए हैं। जिला पंचायत के कर निरीक्षक बीएस नेगी ने बताया कि ऊखीमठ ब्लॉक के अंतर्गत मनसूना, राऊलेंक, कालीमठ, जाल तल्ला व मल्ला, शल्या तुंलगा, बणसू व सारी में शिविर लगाकर भी अब तक एक हजार से अधिक घोड़ा—खच्चरों का चिकित्सा प्रमाण पत्र के आधार पर पंजीकरण किया जा चुका है। इसके अलावा 200 डंडी—कंडी मालिकों का भी पुलिस सत्यापन के बाद पंजीकरण किया गया। जिला पंचायत की ओर से घोड़ा—खच्चर व डंडी—कंडी की 250 रुपये लाइसेंस फीस ली गई। जबकि, संबंधित पशु मालिक व मजदूर का 36 रुपया बीमा प्रीमियम और 204 रुपये टोकन फीस ली गई। गंगोत्री धाम के कपाट खुलने में अब सिर्फ तीन दिन का समय शेष है और इसी के साथ चारधाम यात्रा भी शुरू हो जाएगी। बावजूद इसके यात्रा तैयारियां अब भी मुंह चिढ़ा रही हैं। हालात बता रहे कि गंगोत्री धाम की यात्रा के दौरान यात्रियों को सड़क से लेकर घाट तक तमाम दुश्वारियों से दो—चार होना पड़ेगा।
ऑलवेदर रोड निर्माण के कारण ;षिकेश से लेकर उत्तरकाशी तक गंगोत्री हाइवे पर न सिर्फ धूल के गुबार उठ रहे हैं, बल्कि और जगह—जगह गड्ढे भी बने हुए हैं। इसके अलावा न तो गंगोत्री धाम में घाटों का निर्माण हो पाया है और न स्वास्थ्य, संचार व जाम की समस्या से निपटने को कोई प्रभावी कदम उठाए गए हैं। हालांकि, प्रशासन सात मई को धाम के कपाट खुलने से पूर्व व्यवस्थाएं चाक—चौबंद होने के दावे कर रहा है।
गंगोत्री धाम में भागीरथी (गंगा) नदी के एक किमी लंबे तट पर रोजाना हजारों लोग डुबकी लगाते हैं। इस लिहाज से हर यात्रा सीजन के दौरान गंगोत्री में घाटों के निर्माण के साथ सुरक्षा इंतजाम भी किए जाते हैं। लेकिन, इस बार गंगोत्री में न तो घाट बने हैं और न सुरक्षा के इंतजाम ही किए गए हैं। जो कार्य हो भी रहा है, वह महज खानापूर्ति के लिए है। जबकि, बीते तीन वर्षों में स्नान के दौरान गंगोत्री धाम में आठ यात्री बह चुके हैं। जाहिर है कि बिना सुरक्षा इंतजाम के भागीरथी में स्नान करना खतरे से खाली नहीं है। प्रशासन के अनुसार इस बार घाट निर्माण के लिए आचार संहिता लगी होने के कारण बजट नहीं आ सका। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल बताते हैं कि गंगोत्री में घाटों पर एसडीआरएफ व सुरक्षा कर्मियों की तैनाती रहेगी। साथ ही यात्रियों को भी खतरों से सावधान किया जाएगा।
ऋषिकेश से लेकर उत्तरकाशी तक गंगोत्री हाइवे पर जगह—जगह ऑलवेदर रोड का कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। हाइवे पर जहां—जहां चौड़ीकरण आदि के कार्य हुए हैं, वहां अभी सड़क पक्की नहीं हो पाई। ऐसे में मौसम साफ रहा तो इस मार्ग पर धूल और गड्ढों की परेशानी से यात्रियों को जूझना पड़ेगा। जबकि, बारिश होने पर कीचड़ व दलदल मुश्किल में डालेगा।
देश के कोने—कोने में अधिकांश मोबाइल कंपनियों का इंटरनेट 4जी की स्पीड से दौड़ रहा है। मोबाइल पर ऑनलाइन बातचीत और फेसबुक पर लाइव वीडियो की भरमार है। लेकिन, विश्व प्रसिद्ध धाम गंगोत्री में संचार सेवा की स्थिति बदहाल है। स्थिति यह है कि वर्षभर गुलजार रहने वाली हर्षिल घाटी में बीते दो माह से संचार सेवा ठप पड़ी हुई है। हर्षिल निवासी माधवेंद्र रावत व बगोरी के प्रधान भवान ङ्क्षसह ने बताया कि हर्षिल घाटी के ग्रामीणों व हर्षिल आने वाले पर्यटकों को फोन करने के लिए 50 किमी दूर भटवाड़ी जाना पड़ रहा है।
चारधाम यात्रा का मुख्य पड़ाव उत्तरकाशी शहर में इस बार जाम की समस्या से पार पाना प्रशासन के लिए चुनौती होगा। उत्तरकाशी शहर के पास से ही केदारनाथ मार्ग को जोडऩे वाले जोशियाड़ा मोटर पुल पर बड़े वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई है। इस लिहाज से अब बड़े वाहनों की आवाजाही बड़ेथी और तेखला से होगी। ऐसे में ज्ञानसू और भटवाड़ी रोड पर जाम का झाम लगना तय है। दूसरी परेशानी शहर में पार्किंग को लेकर है। प्रशासन के पास अस्थायी तौर पर पार्किंग के लिए केवल रामलीला मैदान उपलब्ध है, जो यात्रा बढऩे पर नाकाफी साबित होगा। इस पार्किंग में सबसे अधिक परेशानी केदारनाथ जाने वाली बड़ी बसों के यात्रियों को झेलनी पड़ेगी। इसके अलावा प्रशासन और पुलिस ने अभी ट्रैफिक प्लान भी नहीं बनाया है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि ट्रैफिक प्लान के संबंध में पुलिस को पत्र भेजा गया है। ट्रैफिक प्लान आने के बाद इसे जारी किया जाएगा।
इस यात्रा सीजन में नालूपानी डेंजर जोन मुश्किलें पैदा करेगा। बरसात शुरू होते ही यहां भूस्खलन शुरू हो जाएगा। इस भूस्खलन जोन का ट्रीटमेंट भले ही ऑलवेदर के तहत किया जा रहा हो, लेकिन अवैज्ञानिक तरीके से ट्रीटमेंट होने के कारण वह टिक नहीं पा रहा।
गंगोत्री यात्रा मार्ग पर शौचालय अभी पर्याप्त संख्या में नहीं बने हैं। इसके अलावा जो शौचालय हैं भी, उनमें पानी का इंतजाम नहीं है। ऐसे में यात्रियों की आमद बढऩे पर इन शौचालयों में गंदगी बढ़ जाती है और यात्री इनका उपयोग करना बंद कर देते हैं। धरासू से लेकर गंगोत्री तक अधिकांश शौचालयों का कमोबेश यही हाल है।
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