महाराष्ट्र में सियासी भूचाल में क्या भाजपा के लिए कोशियारी होंगे गेम चैनज़र ?
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महाराष्ट्र :
महाराष्ट्र में जारी संकट के बीच सवाल उठता है कि आगे राज्यपाल के पास क्या विकल्प रहेंगे? विधानसभा अध्यक्ष की क्या भूमिका होगी? महाराष्ट्र में बिना चुनाव के ही किसी दूसरे गठबंधन की सरकार बनने की क्या संभावना है?

महाराष्ट्र के मौजूदा हालात को देखते हुए राज्य में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार खतरे में नजर आ रही है. शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे सहित 17 से अधिक विधायक पार्टी के संपर्क में नहीं हैं. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि वहां के हालात कैसे हैं और क्या उद्धव ठाकरे सरकार गिर सकती है?
महाराष्ट्र में सोमवार को हुए विधानपरिषद चुनाव (Vidhan Parishad Election) के बाद राज्य में सियासी भूचाल मचा हुआ है. यहां भले ही शिवसेना (Shiv Sena), कांग्रेस (Congress) और एनसीपी (NCP) के नेतृत्व वाला (महाविकास अघाड़ी) गठबंधन सत्ता में हो, लेकिन भाजपा (BJP) ने 5 सीटों पर जीत दर्ज करके सबको चौंका दिया. दूसरी ओर शिवसेना, NCP को 2-2 सीटें मिलीं और कांग्रेस 1 सीट ही जीत पाई. इसके बाद क्रॉस वोटिंग (Cross Voting) और पार्टी को धोखा देने की बातें होने लगीं. भाजपा अपने विधायकों के बल पर सिर्फ चार उम्मीदवारों को ही जीत दिला सकती थी, लेकिन उसने 5 उम्मीदवार खड़े किए. क्रॉस वोटिंग के दम पर भाजपा ने अपने पांचों उम्मीदवारों को जीत भी दिला दी.
ये उम्मीदवार विधानपरिषद चुनाव में जीते
भाजपा – प्रवीण दरेकर, राम शिंदे, उमा खापरे, श्रीकांत भारतीय, प्रसाद लाड
शिवसेना – सचिन अहीर, आमश्या पाड़वी
एनसीपी – एकनाथ खड़से, रामराजे निंबालकर
कांग्रेस – जगताप
राज्य सरकार में सहयोगी कांग्रेस के एक उम्मीदवार को न जिता पाने और भाजपा उम्मीदवार के जीतने से सबसे ज्यादा आघात शिवसेना को ही लगा है. राज्य की सत्तारूढ़ महाविकास अघाड़ी को 10 दिन के भीतर यह दूसरा झटका लगा है. बता दें कि इससे पहले 10 जून को भी राज्यसभा चुनाव में बीजेपी अपने तीनों उम्मीदवारों को जीत दिलाने में कामयाब रही थी. वहीं मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना को अपने दूसरे उम्मीदवार को हारते हुए देखना पड़ा था.
कितना बड़ा है मौजूदा संकट
इस प्रश्न का उत्तर हर कोई जानना चाहता है कि आखिर मौजूदा संकट राज्य की उद्धव ठाकरे सरकार के लिए कितना बड़ा है? इस प्रश्न का उत्तर आसान नहीं है. फिर भी अगर सिर्फ शिंदे और 17 अन्य विधायक ही महाविकास अघाड़ी सरकार से अलग होते हैं तो सरकार को कोई खतरा नहीं है, क्योंकि मौजूदा दौर में उद्धव सरकार को 169 विधायकों का समर्थन हासिल है और 17 विधायकों के बाहर निकल जाने के बाद उनके पास 152 विधायकों का समर्थन होगा. जबकि राज्य की 288 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 145 है. इस तरह से राज्य की महाविकास अघाड़ी सरकार को कोई खतरा नजर नहीं आता.
कांग्रेस के कई विधायकों के टूटने की भी आशंका
भाजपा का दावा है कि कांग्रेस के कुछ विधायक भी उनके संपर्क में हैं. ऐसे में अगर यह विधायक भी महाविकास अघाड़ी सरकार से अलग होने की घोषणा करते हैं तो सरकार खतरे में आ सकती है. खबर है कि अपने एक उम्मीदवार की हार से कांग्रेस में खासी नाराजगी है और राज्य में कैबिनेट मंत्री वरिष्ठ कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट इस्तीफा दे सकते हैं.
राज्यपाल के अधिकारों पर क्या कहती है सुप्रीम कोर्ट?
महाराष्ट्र संकट को लेकर सुप्रीम कोर्ट का 2016 का एक फैसला महाविकास अघाड़ी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। दरअसल, 2016 में अरुणाचल प्रदेश में इसी तरह के सियासी संकट के बीच राज्यपाल ने बागी कांग्रेस विधायकों और भाजपा विधायकों की मांग पर विधानसभा सत्र बुलाया था। इस सत्र का एजेंडा स्पीकर को हटाना था। राज्यपाल के इस कदम के खिलाफ जब विधानसभा अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तो न्यायालय ने कहा कि गवर्नर सिर्फ कैबिनेट की सलाह पर ही सत्र बुलाने का फैसला कर सकते हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि अगर राज्यपाल को लगता है कि मुख्यमंत्री और उनके मंत्री परिषद सदन का विश्वास खो चुका है, तो वे बहुमत परीक्षण का आदेश दे सकते हैं।
. विधानसभा में बहुमत परीक्षण
एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद कहा जा रहा है कि उन्हें 37 से ज्यादा शिवसैनिकों समेत कुल 46 विधायकों का समर्थन हासिल है। उनका यही बयान एमवीए सरकार के लिए सिरदर्द बना हुआ है। अगर राज्यपाल कैबिनेट की मांग पर सत्र बुलाते हैं तो उद्धव सरकार के पास एक विकल्प विधानसभा में बहुमत साबित करने का है। हालांकि, अगर एकनाथ शिंदे का शिवसेना को तोड़ने का दावा सही है तो एमवीए सरकार का विधानसभा अध्यक्ष के पास बहुमत साबित करने के लिए जाने का फैसला गलत साबित हो सकता है। ऐसे में राज्य में फिलहाल तीन तस्वीरें बनती दिख रही हैं…
अगर 46 विधायक महाविकास अघाड़ी गठबंधन से समर्थन वापस लेते हैं और महाराष्ट्र सरकार अल्पमत में आ जाएगी। दल-बदल कानून के तहत अगर एकनाथ शिंदे को बिना अयोग्य करार हुए शिवसेना को तोड़ना है तो उन्हें 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी।
इन्हीं नियमों के मुताबिक, अगर यह बगावती गुट शिवसेना के दो-तिहाई विधायकों (37) को साथ ले आता है तो महाविकास अघाड़ी सरकार गिर जाएगी। इसका असर यह होगा कि महाराष्ट्र में बिना अगले चुनाव करवाए ही भाजपा सत्ता पर काबिज होने में सफल हो सकती है। ऐसे में यह रास्ता शिवसेना के लिए सबसे कठिन माना जा रहा है।
अगर शिंदे और उनके समर्थक इस्तीफा भी दे दें तो एमवीए सरकार विश्वास मत हार जाएगी। हालांकि, शिंदे की मांग को मानते हुए शिवसेना सहयोगी दल कांग्रेस और राकांपा से गठबंधन तोड़कर एक और विकल्प पा सकती है। वह भाजपा के साथ मिल कर सरकार बना ले तो महाराष्ट्र को एक बार फिर पुराने गठबंधन की सरकार मिल सकती है। हालांकि, मौजूदा परिदृश्य में यह संभावना काफी मुश्किल है।
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