मेयर की कुर्सी हासिल होने के बाद जनता से दूरी क्यों…!

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रुड़की:  हाल ही में सम्पन हुए नगर निगम चुनाव में मेयर पद के निर्दलीय प्रत्याशी गौरव गोयल को शहर की जनता ने अपना मेयर चुना है। चुनाव में गौरव गोयल को जनता का इतना प्यार मिला की शहर की जनता ने प्रदेश की दोनों प्रमुख पार्टी कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों को पूरी तरह से नकार दिया था ।

आजकल शहर में आम चर्चा है की मेयर बनने के बाद गौरव गोयल में काफी बदलाव देखने को मिल रहे है। लोगो का कहना है की चुनाव से पहले जनता के बीच रहने वाले गौरव गोयल चुनाव जीतने के बाद अब जनता से दूरी बनाते हुए नजर आ रहे है ।लोगो का कहना है की शहरवासियो के हर सुख दुःख में शामिल होने वाले गौरव गोयल जीत हासिल करते ही पलट गए है। चुनाव से पहले और जीत के बाद उनके व्यवहार का काफी बदलाव आ चूका है।

इसका एक उदाहरण आज देखने को भी मिला है। आज शहर में दो अंतिम संस्कार हुए है एक भाजपा नेता और समाजसेवी पंकज नंदा की माता का और एक वरिष्ठ पत्रकार राकेश मदान का, ख़ास बात यह है की गौरव गोयल दोनों के ही अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए। ऐसा भी नहीं है की गौरव गोयल शहर से कहीं बाहर थे और उनको इनके अंतिम संस्कार की जानकारी नहीं थी। उनको दोनों की जानकारी थी लेकिन उन्होंने इनके अंतिम संस्कार में शामिल होने की जगह नगर निगम में बैठना ज्यादा जरूरी समझा। दोनों के अंतिम संस्कार में मेयर गौरव गोयल के शामिल नहीं होने को कुछ लोग एक बार फिर से बनिया पंजाबी राजनीति से भी जोड़कर चल रहे है ,क्योंकि जिन दोनों के आज अंतिम संस्कार हुए है दोनों ही पंजाबी बिरादरी से ताल्लुक रखते है ।लोगो में चर्चा है की शायद गौरव गोयल इसी कारण दोनों अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए ।

चुनाव को बीते करीब डेढ़ महीना बीत चूका है ।ऐसा नहीं की गौरव गोयल में बदलाव अब आया है ,चुनाव में उनके साथ दिन रात मेहनत करने वाले कई लोग जीत के बाद से ही उनमे बदलाव देखकर उनका साथ छोड़ देने का दावा भी कर रहे है। अब देखना यह होगा की यह जीत का चुनाव गौरव गोयल की राजनीति को कहाँ तक लेकर जाता है या फिर यह जीत उनकी पहली या अंतिम साबित होती है।


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