अंतिम यात्रा पर निकले शहीद सुनील कुमार, अमर रहे से गूंजा आसमां…

बिहार: शहीद सुनील कुमार अमर रहें… जब तक सूरज चांद रहेगा सुनील तेरा नाम रहेगा… वंदे मातरम.. एक के बदले सौ लेंगे…इन नारों से गुरुवार की सुबह आसमां गूजं गया।

लद्दाख में चीन के साथ झड़प में शहीद हुए जवानों के पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचने लगे हैं। शहीदों के गांवों में ग़म और गुस्से का माहौल है। इस झड़प में बिहार के बिहिटा के जवान हवलदार सुनील कुमार भी शहीद हो गए। शहीद सुनील कुमार का पार्थिव शरीर गुरुवार की सुबह उनके घर सिकरिया के तारापुर गांव पहुंच गया।

लद्दाख सीमा पर शहीद 16 बिहार रेजीमेंट के जवान सुनील को जब अंतिम विदाई दी जा रही थी, तो उनकी पत्नी ने खुद को संभालते हुए पति को सलामी दी। उन्होंने कहा- मेरा सुनील अमर रहे। इस दौरान गांव के नौजवानों ने शहीद की आखिरी विदाई के लिए 400 मीटर लंबा तिरंगा तैयार कराया था। इसी तिरंगे की छांव में शहीद सुनील का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए उनके घर पहुंचा। इस दौरान शहीद सुनील कुमार अमर रहें और भारत माता की जय के नारों से पूरा गांव गूंज उठा।

घर पर पहुंचे सेना के अधिकारियों ने आवश्यक कार्यवाही पूरी करने के बाद शहीद के शव को उनके परिजनों को सौंप दिया। इसके बाद घर मे हिन्दू रीति रिवाजों के साथ संस्कारों को परिजनों ने पूरा किया। इसके बाद वीर जवान की शव यात्रा शुरू हुई। शहीद सुनील का पार्थिव शरीर जिस रास्ते से गुजरा वहां के लोगों ने छतों से शहीद पर फूलों की बारिश की। परिजनों ने बताया कि सेना के जवानो के साथ परिजन शव को लेकर मनेर के हल्दी छपरा जाएंगे जहां पर गार्ड ऑफ ऑनर के साथ-साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

बता दें कि शहीद सुनील कुमार ने 2002 में बिहार रेजिमेंट में ज्वाइन किया था। इनकी शादी 2003 में हुई थी। शहीद सुनील अपने पीछे अपनी पत्नी, 2 बेटों और एक बेटी को छोड़ गए हैं।


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