उत्तराखंड में औषधीय पौधों और पारंपरिक औषधीय ज्ञान का प्रचुर भण्डार: सतपाल महाराज

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देहरादून: उत्तराखण्ड के पर्यटन, तीर्थाटन एवं धार्मिक मेले, संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने  नई दिल्ली में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा “वैलनेस समिट-2020” के तहत रोड शो का आयोजन में प्रतिभाग किया।

रोड शो में सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तराखण्ड में औषधीय पौधों और पारंपरिक औषधीय ज्ञान का प्रचुर भण्डार है। उत्तराखण्ड के पहाड़ों में, औषधीय पौधों का उपयोग लंबे समय से विभिन्न रोगों के उपचार के लिए किया जाता है और इन परंपराओं को संरक्षित करने की आवश्यकता है। पारम्परिक औषधीय ज्ञान का हमारे साथ बहुत पुराना रिश्ता है, जो रामायण्काल से चला आ रहा है।

किंवदंती है कि राम और रावण के बीच हुए महान युद्व में, जब लक्ष्णम बुरी तरह से घायल हो गए थे और जीवन रक्षक जड़ी बूटी “संजीवनी बूटी” की जरूरत थी, हनुमान जी ने उत्तराखण्ड के हिमालय में द्रोणागिरी “दूनागिरी पर्वत” से इस जड़ी-बूटी को लाकर लक्ष्मण की जान बचाई। आधुनिक युग की जीवनशैली के फलस्वरूप उत्पन्न होने वाली विभिन्न बिमारियों से बचाव के लिए योग और आयुर्वेद एक प्रभावशाली विकल्प है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य गठन के  हमने “आयुष राज्य” बनने का संकल्प व्यक्त किया है।जहां आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को प्रमुखता दी जाएगी और पर्यटकों को इन उपचारो का लाभ उठाने का अवसर प्रदान किया जाएगा।

उत्तराखण्ड के चार प्रसिद्व हिमालयी तीर्थस्थल बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में हर साल “चार धाम” यात्रा करने वालों के अलावा, वे आगन्तुक भी है। जो अपने मन और शरीर अपनी आत्माओं को फिर से जीवंत करना चाहते हैं और शान्ति एवं स्वस्थ मन चित्त की खोज में उत्तराखण्ड में ही प्रवास करना चाहते है।उन्होनें बताया कि उत्तराखण्ड राज्य में स्वास्थ्य और वैलनेस पर्यटन की संभावनाएं बहुत अधिक है, जो योग एवं आयुर्वेद की स्वदेशी उपचार प्रणाली का आधार है।

उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप उत्तराखण्ड सरकार का ध्यान “सुधार प्रर्दशन-परिवर्तन” एवं एक नागरिक अनुकूल और उत्तरदायी प्रशासन के प्रति केन्द्रित है। राज्य ने “ईज आॅफ डुईंग बिजनेस” पहल के माध्यम से आवेदन प्रक्रियाओं के सरलीकरण, प्रौद्योगिकी का लाभ लेते हुए सार्वजनिक इंटरफेस में पारदर्शिता लाकर तरह-तरह की मंजूरी के लिए समय-सीमा में कमी की है।

 


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