विधान सभा भर्ती घोटाला: सरकार की किसने कराई फ़ज़ीहत!

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लोकजन टुडे।

ना खाऊंगी  ना खाने दूंगी …भाई भतीजावाद बिल्कुल नहीं चलेगा… ऐसा ही कहा था ना विधानसभा अध्यक्षा ने… लेकिन ऐसा हो नहीं सका माननीय उच्च न्यायालय ने  विधानसभा भर्ती मामले में सरकार जिन पदो को बर्खास्त करने चली थी उन्हें पहले स्टे दिया गया और फिर  जॉइनिंग देनी पड़ेगी। वही विधानसभा अध्यक्ष की कार्यवाई क़ो एक और झटका लगा जबकि 2016 की भर्ती वालों के बाद आज 2021 की भर्ती वालों क़ो भी कोर्ट से स्टे मिल गया इनकी संख्या 73 हैं ऐसे में इन्हें भी जल्द ही जोइनिंग की प्रक्रिया के तहत विधानसभा में फिर से काम करने का मौका मिलेगा। धामी सरकार को निश्चित ही भ्रष्टाचार पर करारा पंच पड़ गया उल्टा दंश… क्या सरकार ने इस पूरे मामले में विधिक राय नहीं ली थी या जांच टीम की जांच में मजबूत सबूत ही नहीं थे? या फिर सरकर को इस बात का ही नहीं पता था किसी को बर्खास्त करने से पहले क्या नियम और कायदे होते हैं अगर हां ऐसा ही था तो निश्चित सरकार के लिए यह बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है कि आपके कितने मोहल्ले के बाद जो उसका निष्कर्ष निकला खोदा पहाड़ निकली चुहिया को चरितार्थ करता हुआ साबित हुआ… सूत्रों के हवाले से बेहद बड़ी खबर यह भी आ रही है इस पूरे मामले में सरकार की तरफ से मजबूत पैरवी कोर्ट में नहीं की गई जिसकी वजह से इन लोगों को दुबारा से जॉइनिंग देनी पड़ेगी सरकार की भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की कवायद पर एक बड़ा स्पीकर की तरह यह फैसला साबित हुआ…

क्या पूर्व अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल पर जितने आरोप लगाए जा रहे थे क्या उनकी फ़ज़ीहत करने के लिए लगाए जा रहे थे? बेचारे मंत्री जी लगातार इस बात को कह रहे थे की नियुक्तियों में कोई घपला नहीं हुआ है फिर भी लगातार सुर्खियों में बने हुए थे बिचारे मंत्री जी के पीछे कौन पड़ गया था.. विपक्ष के पास भी बड़ा मुद्दा हाथ लग गया था लेकिन क्या अब विपक्ष इस मामले को भुना पाएगा?

बहराल मामला चाहे कुछ भी हो माननीय उच्च न्यायालय ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए जो होते एक पक्ष बेहद खुश है तो दूसरा पक्ष कीप साइलेंट की स्थिति में आ गया… यह जरूर है कि धामी सरकार को इस फैसले के बाद काफी सोचना पड़ रहा होगा जो विधा में सरकार ने लगातार पनपते भ्रष्टाचार से सख्ती से निपटने की बात कही थी क्या कोई धाकड़ धामी के धाकड़ फैसलों को कमजोर करने के लिए जुट गया है अगर ऐसा है तो निश्चित तौर पर धाकड़ हम इस सरकार को इस ओर गंभीरता से सोचना चाहिए नहीं तो आने वाले समय में कहीं कोई बड़ा खेल ना खेल जाए…


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