राहत इंदौरी का सहारनपुर से था गहरा नाता…

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रिपोर्ट: सैयद मशकूर

सहारनपुर: मशहूर शायर जनाब राहत इंदौरी साहब का सहारनपुर से गहरा नाता था। पिछले करीब 30 सालों से सहारनपुर के मुशायरो में अपने कलाम पेश कर लोगों को वाह-वाह कहने पर मजबूर कर देते थे। जब जब सहारनपुर में मुशायरा हुआ तब तब जनाब राहत इंदौरी को यहां पर बुलाया गया।

इस बारे में पार्षद मंसूर बदर ने बताया कि राहत इंदौरी साहब सहारनपुर में सबसे पहला मुशायरा मेरे वालिद मरहूम अय्यूब हसन बदर के संयोजन में पढ़ने की एवज मे 250 रुपए लिए थे। उन्होंने कहा कि उर्दू/हिंदी शायरी के एक युग का आज अंत हो गया। हमारे बीच राहत इन्दोरी नहीं रहे मेरे चचा राहत भाई के बेटे सतलज ने मुझे बताया कि कोविड 19 की वजह से वो हॉस्पिटल में थे, वही उनको हार्ट अटैक आया सहारनपुर और मेरे परिवार से उनका अटूट रिश्ता रहा है। सहारनपुर का आखरी मुशायरा मेला गुघाल का उन्होंने मन्सूर बदर के संयोजन में ही पढा। वही उन्होंने बताया कि मन्सूर के वालिद जनाब अय्यूब हसन बदर ने सबसे पहले उनको सहारनपुर में मुशायरा पढ़वाया और हदिया के तौर पर 250 रुपया दिए उन्होंने कहा था कि जब जब मन्सूर मुझे याद करेगा।

मै हमेशा सहारनपुर आता रहूँगा पार्षद मन्सूर बदर ने बताया कि उन्होंने लगभग 24 मुशायरा कराए है और उन सब मे राहत भाई की मौजूदगी रही। मन्सूर ने बताया कि सहरनपुर महोत्सव में उनके पास इंडो-पाक मुशायरा था और राहत भाई अमेरिका में थे लेकिन मुशायरा पढ़ने सहारनपुर आये वो ज़बान के बहुत पक्के आदमी रहे। जिससे वादा कर लिया निभाया आखरी मुशायरा में भी उनकी तबीयत खराब चल रही थी लेकिन मेरे वालिद मरहूम के प्यार में वो बेटे सतलज के साथ मुशायरा पढ़ने आये आज अदब की दुनिया का एक चमकदार सितारा हम लोगो के बीच से चला गया उनके शेर तुफानो से आँख मिलाओ,सैलाबों पे वार करो! मल्लाहों का चक्कर छोड़ो , तैर के दरिया पार करो ऐसे अनगिनत शेर है जो सैकड़ो सालो तक लोगो को याद रहेंगे।

नगर के मौज़िज़ लोग मसूद बदर,नोशाद ख़ान, गुलाम रब्बानी ख़ान, नासिर ख़ान, मसरूर बदर,मारूफ बदर,सईद सिद्दीकी, शहज़ाद मलिक, डॉक्टर अहसान,नोशाद राजा,सलीम आदि लोगो ने उनको याद किया।


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