ब्रिटेन की प्रधानमंत्री लिज़ ट्रस ने अपने पद से दिया इस्तीफ़ा

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लंदन, 20 अक्टूबर : ब्रिटेन की प्रधानमंत्री लिज़ ट्रस ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। वे सिर्फ छह हफ्तों तक इस पद पर रहीं। ब्रिटेन इस वक्त मुश्किल आर्थिक हालात से गुजर रहा है और ट्रस के इस्तीफे के साथ ब्रिटेन में अस्थिरता का दौर फिलहाल खत्म होता नहीं दिखता। ट्रस ने अपने इस्तीफे के बारे में बकिंघम पैलेस को सूचित कर दिया है और वैकल्पिक व्यवस्था होने तक उनसे पद पर बने रहने को कहा गया है। लिज़ ट्रस के इस्तीफ़े से पहले उनकी सरकार की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने इस्तीफा दे दिया था और आर्थिक मामलों के मंत्री को खुद उन्होंने उनके पद से बर्खास्त कर दिया था। उसके बाद, कंज़र्वेटिव पार्टी के सांसदों में उनके खिलाफ बगावत के हालात पैदा हो गए थे।

 

हालांकि कल तक लिज़ ट्रस के तेवर देखते हुए ऐसा नहीं लग रहा था कि वे पद छोड़ने वाली है। उन्होंने कहा था कि, वे एक फाइटर हैं और मोर्चा छोड़ कर भागेंगी नहीं। अभी डेढ़ महीने पहले हुए पार्टी चुनावों में ट्रस का मुकाबला भारतीय मूल के ऋषि सुनक के साथ था और अपनी आर्थिक नीतियों को लेकर तमाम विरोधों के बावजूद वे पार्टी सांसदों की पसंद बनीं और सुनक चुनाव हार गए।

 

प्रधानमंत्री कार्यालय 10 डाउनिंग स्ट्रीट के सामने संवाददाताओं से बात करते हुए लिज़ ट्रस ने कहा कि जिस मैन्डेट के तहत उनका चुनाव हुआ था उसे वे पूरा नहीं कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि जिस दौर में उनका चुनाव प्रधानमंत्री के पद पर हुआ वो आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अस्थिरता का दौर था। उन्होंने कहा कि, पार्टी नेता का चुनाव अगले सप्ताह होगा और जब तक उनका उत्तराधिकारी नहीं चुना जाता, वे बतौर कार्यकारी प्रधानमंत्री, पद पर बनी रहेंगी।

 

लिज़ ट्रस ने 44 दिन पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के तौर पर सत्ता संभाली थी। पद से हटने के बाद वे सबसे कम समय तक सत्ता संभालने वाली ब्रितानी प्रधानमंत्री बन जाएंगी। पार्टी नेता चुने जाने के बाद उन्होंने जो भाषण दिया उसका अंत करते हुए उन्होंने कहा था कि, ‘वी विल डेलीवर, वी विल डेलीवर, वी विल डेलीवर’ यानी वे वादे पूरे करेंगी। साथ ही उन्होंने कहा कि 2024 के आम चुनावों में उनकी पार्टी लेबर पार्टी को परास्त करेगी। ट्रस के इस्तीफे के एलान के बाद लेबर पार्टी के नेता सर कीर स्टर्मर ने तुरंत देश में आम चुनाव कराने की मांग की है।

 

लिज़ ट्रस पर अपनी सरकार के मंत्रियों के इस्तीफे के बाद पद छोड़ने का दबाव बढ़ गया था। उनके विकल्प के तौर पर कई नामों की चर्चा हो रही है उनमें भारतीय मूल के ऋषि सुनक और पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस ज़ॉनसन के नाम भी शामिल हैं। लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता के सबसे बड़े दौर से गुजर रहे ब्रिटेन के लिए आम चुनाव ही एक रास्ता बचा है।

 

ब्रिटेन इस समय बेतहाशा महंगाई और खस्ताहाल अर्थव्य़वस्था से जूझ रहा है। विदेश नीति के मोर्चे पर बड़ी चुनौतियां पहले से मौजूद हैं। लिज़ ट्रस के निर्वाचन की घोषणा होते ही पाउंड की कीमत में ऐतिहासिक गिरावट देखी गई थी। ये मुद्रा 1985 की स्थिति में पहुंच गई। ट्रस ने चुनावों के दौरान कई लोकलुभावन वादे किए और कॉर्पोर्शन टैक्स के खात्मे की बात भी कही। बतौर वित्त मंत्री ऋषि सुनक ने अप्रैल में नेशनल इंश्योरेंस या राष्ट्रीय बीमा वृद्धि की थी जबकि लिज़ ने वचन दिया था कि वो इस बढ़ोतरी को वापस ले लेंगी। उनकी दलील थी कि भारी कर अर्थव्यवस्था के विकास में बाधक होते हैं।


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