बच्चों को शांत रखने के लिए मोबाइल देना बड़ी गलती !

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देहरादून : कई बार बच्चे ज्यादा जिद करते हैं या रोते हैं तो उन्हें चुप कराने के लिए माता-पिता उन्हें मोबाइल थमा देते हैं। इससे तत्काल तो बच्चा शांत हो जाता है, लेकिन इसके कई गंभीर परिणाम सामने आए हैं। बच्चों की परवरिश से जुड़ी यह एक बड़ी गलती है। वे चिड़चिड़े हो जाते हैं, आक्रामक व्यवहार करते है। इससे बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी तो कम होती ही है, वहीं उनके व्यवहार में भी बढ़ती उम्र के साथ परिवर्तन आ जाता है। ऐसे बच्चे भावनात्मक रूप से काफी कमजोर होते हैं। इसका असर लड़कों में ज्यादा नजर आ रहा है। 3-5 साल की उम्र के बच्चों को शांत करने के लिए स्मार्टफोन और टैबलेट जैसे डिवाइस का बार-बार इस्तेमाल लड़कों में भावनात्मक विकृति पैदा कर सकता है। स्क्रीन टाइम बढ़ने से उनका व्यवहार नकारात्मक हो रहा है। साथ ही चुनौतीपूर्ण व्यवहारों के प्रति उनका रिएक्शन खराब हो जाता है। इतना ही नहीं, शरीर में एक प्रकार की शिथिलता आ जाती है। बच्चों के मूड स्विंग्स होना शुरू हो जाते हैं। कई बार वे बेहद उत्तेजित हो जाते हैं, तो कई बार चेहरे पर उदासी और मायूसी छा जाती है। इस तरह के लक्षण दिखाई दें तो बच्चों को मोबाइल देना बंद कर देना चाहिए।

बच्चों को शांत करने के लिए कई वैकल्पिक एक्टीविटीज का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो उनके विकास में मददगार साबित हों। झूला झूलने, ट्रैम्पोलिन पर कूदने, क्ले से खेलने, टीवी या ऑडियो पर गाने सुनने जैसी गतिविधियों से उनका ध्यान भटका सकते हैं।


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