Dussehra Special: जानिए दस मुख वाले रावण के बारे में कुछ अच्छी बातें…

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आज सभी लोग दशहरे का पर्व मनाते हैं क्योंकि यह पर्व केवल एक त्योहार ही नहीं है बल्कि यह बुराई पर अच्छाई का सूचक है। हर कोई दानव रावण को एक बुराई के रूप में देखता है क्योंकि उसने धोखे से पराई नारी का अपहरण किया था। लेकिन दानव होते हुए भी रावण में बहुत सारी अच्छाईयां भी थी जिसके कारण आज देश के कोई कोने में रावण की पूजा होती है।

आईये जानते हैं 10 मुख वाले रावण की अच्छी बातें..

काफी योग्य: रावण एक कुशल राजनीतिज्ञ, सेनापति और वास्तुकला का मर्मज्ञ होने के साथ-साथ बहु-विद्याओं का जानकार था।

मायावी: रावण को मायावी इसलिए कहा जाता था कि वह इंद्रजाल, तंत्र, सम्मोहन और तरह-तरह के जादू जानता था।

महापंडित रावण : रावणबहुत बड़ा पंडित था और इसी कारण भगवान राम ने उससे विजय यज्ञ करवाया था।

शिवभक्त रावण

भगवान शिव ने खुद कहा था कि रावण बहुत बड़ा शिवभक्त है, उसकी भक्ति पर भगवान राम को भी शक नहीं था।

बहुत बड़ा राजा

रावण बहुत बड़ा और अच्छा राजा था, उसकी सोने की लंका में उसके राज्यवाले बहुत ज्यादा खुश रहते थे। इसी कारण भगवान राम ने लक्ष्मण को भेजा था उसके पास राजनीति के टिप्स लेने को।

कई शास्त्रों का रचयिता रावण

रावण ने तांडव स्तोत्र, अंक प्रकाश, इंद्रजाल, कुमारतंत्र, प्राकृत कामधेनु, प्राकृत लंकेश्वर, ऋग्वेद भाष्य, रावणीयम, नाड़ी परीक्षा आदि पुस्तकों की रचना की थी।

बहन का रक्षक

बहन शूर्पणखा के अपमान का बदला लेने के लिए रावण ने सीताहरण किया था। उसने कहा था कि वो भाई धर्म निभा रहा है।

पौरूष का गलत प्रयोग नहीं

यद्यपि रावण ने सीता का हरण किया था लेकिन उसने कभी भी अपने पौरूष का गलत फायदा नहीं उठाया, उन्होंने दो साल तक सीता को बंदी बनाये रखा लेकिन कभी भी सीता को हाथ नहीं लगाया।

महान कवि

रावण को लोग बहुत बढ़िया कवि कहते थे, उसने कई रचनाएं भी लिखी हैं।


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