देवभूमि की पहचान चार धाम से है बुद्धिज्म से नहीं देहरादून हवाई अड्डे पर बुद्ध की कलाकृति देख बोले: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

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देहरादून :

जौली ग्रांट एयरपोर्ट का नाम हो शंकराचार्य के नाम से

 

देहरादून हवाई अड्डे पर बुद्ध की कलाकृति नहीं देव भूमि की पहचान चार धाम की तस्वीरें हो :शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

 

ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बार फिर देवभूमि उत्तराखंड के देहरादून जॉलीग्रांट एयरपोर्ट को आदि जगद्गुरु शंकराचार्य एयरपोर्ट करने की मांग की है। शंकराचार्य ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है इसलिए भगवान की इस पुण्य धरती से सनातन धर्म का व्यापक प्रचार प्रसार व संदेश भारत के साथ-साथ विश्व में जाना चाहिए। छत्तीसगढ़ से अपने तमाम कार्यक्रमों को स्थगित करते हुए 2 दिन पूर्व जोशीमठ आपदा में पीड़ितों का हालचाल जानने व जोशीमठ रक्षा महायज्ञ आरंभ करने के लिए ज्योतिर्मठ पहुंचे शंकराचार्य आज जोशीमठ से वापस आकर देहरादून हवाई अड्डे से प्रयागराज के लिए प्रस्थान कर रहे थे। हवाई अड्डे पर उन्होंने प्रयागराज जाने से पूर्व इस बात पर चिंता प्रकट की कि एयरपोर्ट के खंभों पर बौद्ध धर्म को लेकर स्लोगन लिखे गए हैं। जबकि उत्तराखंड की पहचान भगवान श्री बदरी विशाल, केदार बाबा, मा गंगोत्री व यमुनोत्री के अलावा कुमाऊं मंडल के तीर्थ स्थानों को लेकर के है। उन्होंने कहा कि वह बौद्ध धर्म के विरोधी नहीं है वे हमारे ही लोग हैं लेकिन देवभूमि उत्तराखंड का हवाई अड्डा एक दृष्टिकोण से इन धामों में दर्शन को जाने के लिए प्रवेश द्वार है इसलिए प्रवेश द्वार पर भगवान श्री बदरी विशाल व केदार बाबा की जय का स्लोगन होना चाहिए। ज्योतिषपीठाधीश्वर का मानना है कि भले ही आदि जगतगुरु शंकराचार्य ने केरल में जन्म लिया हो लेकिन उत्तराखंड के हिमालय से उनका अटूट रिश्ता वह हिमालय में आकर एक पीठ के रूप में उत्तर की पीठ ज्योतिषपीठ की स्थापना व बदरीनाथ धाम का उद्धार करना और हिमालय में ही केदारनाथ पहुंचकर समाधि लेना अपने आप में सनातन धर्म के लिए महत्वपूर्ण विषय है। शंकराचार्य ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि के एयरपोर्ट व रेलवे स्टेशन की पहचान यहां के धार्मिक स्थलों से जोड़कर से होनी चाहिए।


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