देखिये वीडियो भाई चारे का प्रतीक कावड़

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हरिद्वार में शुरू होने जा रहा कांवड मेला एकता और भाईचारे का भी संदेश देता नजर आएगा मेले के दौरान शिवभक्त कांवडियों की कांवड़ को मेले से पहले भारी संख्या में मुस्लिम समाज तैयार कर रहा है मुस्लिम परिवार के बच्चों को बचपन से कावड़ बनाने का काम विरासत में मिलता है कावड़ बनाने के काम में परिवार के बुज़ुर्ग से लेकर महिलाएं ओर बच्चे भी दिन रात शामिल रहते हैं देखिए धर्मनगरी से आपसी भाईचारे की मिसाल का संदेश दे रही (www.lokjantoday.com) लोकजन टुडे की ये खास रिपोर्ट

https://youtu.be/AjUmiUk52z8

धर्म के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने के किस्से तो आपने बहुत सुने होंगे लेकिन हरिद्वार में शुरू होने जा रहा कांवड मेले में आपसी भाईचारे की बडी मिसाल देखी जा सकती है।कांवडियों के कंधों पर आप जिन सजी कांवडों को देखते हैं उनको बडी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग बनाकर बेचते हैं।पिछले कई दशकों से 25 से जयादा मुस्लिम परिवार हरिद्वार में कावड़ बना रहे है । इन कारीगरों का कहना है की कावड़ भाईचारे का काम है और इनको कांवड़ियों की सेवा का मौका मिलता है। मुस्लिम समाज के इन् कारीगरों के अनुसार इससे ना केवल उनका रोजगार चलता है बल्कि कांवड बनाना उनके लिए बडे शबाब का काम है।

 

https://youtu.be/q1d3Ed665rI

कावड़ बनाने का काम पुरुष ही नही महिलाए भी बड़ी शोक और सहयोग से करती है।कांवड़ बनाने वाली महिलाओ का कहना है की यह सब रोजे से रहकर भी कावड़ बनाते है ।भोले के लिए कावड़ बनने से इनके मन को शांति मिलती है इन बच्चों को विरासत में मिले इस काम को करने से ख़ुशी मिलती है ये अपने घरवालों के साथ कावड़ बनाने का काम करते है कार्य पूरा होने पर कावड़ को ज्वालापुर से हरिद्वार हरकी पोड़ी बेचने जाते है ये बच्चे स्कूल भी जाते हैं कावड़ भी बनाते है और 5 वक़्त की नमाज़ भी पढ़ते हैं।

 


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