सनातनी ‘ऋषि’ युग की ब्रिटेन में शुरुवात – बने पहले भारतवंशी प्रधानमंत्री

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ऋषि सुनक ब्रिटेन के पहले हिंदू प्रधानमंत्री 

गणपति की करते है पूजा, गणपति में आस्था

जन्माष्टमी पर ऋषि ने की थी गौ पूजा

दिवाली में अपने घर पर दिए जलाते दिखाई पड़े थे

ऋषि का राजनैतिक जीवन सिर्फ सात वर्ष का – ऋषि ब्रिटेन में अस्सी प्रतिशत इसाई पॉपुलेशन के बीच अल्प संख्यक हिंदू समाज से बने पहले प्रधानमंत्री

वैश्वीकरण और वसुधैव कुटुंबकम् में यकीन रखते है ऋषि

बड़ी चुनौती ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को घाटे से उबारना

बेरोजगारी को खत्म कर महंगाई को काबू में करना

रोजगार के नए अवसर पैदा करने के साथ चरमरा चुके सर्विस सेक्टर को खड़ा करना।

कौन है ऋषि सुनक

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर (आशीष मिश्र साथ में प्रखर प्रकाश मिश्रा) : वैश्वीकरण के इस दौर में ब्रिटेन ने सनातनी ऋषि सुनक को प्रधानमंत्री बना कर दुनिया को चौंका दिया है। घाटे की अर्थव्यवस्था से उबरने के लिए ब्रिटेन के पास और कोई चारा नहीं था। अब देखना यह है की महान अर्थशास्त्री कौटिल्य के सिद्धांतो पर चलते हुए क्या ऋषि ब्रिटेन को फिर से खोया गौरव दिलवा पाएंगे? राजनीतिक विज्ञान, अर्थशास्त्र और दर्शनशास्त्र के छात्र रहे ऋषि को ब्रिटेन की रिद्धि सिद्धि को वापस लाने के साथ साथ लक्ष्मी रूपी पौंड को भी उसकी खोई रौनक वापस दिलाना हैं। यानी बयालीस वर्षीय ऋषि को अग्नि परीक्षा के दौर से गुजरना पड़ेगा।

ब्रिटेन में जो हुआ वो अप्रत्याशित था। पहले अश्वेत और भारतवंशी ऋषि सुनक को कंजरवेटिव पार्टी ने अपना नेता चुन लिया और किंग चार्ल्स ने उन्हें देश का प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया है। वे 28 अक्टूबर को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। ब्रिटेन इस वक्त बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है। वहां की बीमार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के साथ देश में एक स्थिर सरकार की स्थापना की बड़ी चुनौती है। ऋषि सुनक कोविड महामारी के दौर में ब्रिटेन के वित्त मंत्री (चांसलर ऑफ एक्सचेकर ) थे और उन्होंने सफलतापूर्वक इस महामारी से देश को उबारने में अहम भूमिका निभाई। अब उन पर देश की बीमार और बदहाल अर्थव्यवस्था से निपटने का जिम्मा आ पड़ा है।

ऋषि सुनक का जीवन परिचय

ऋषि सुनक का जन्म 12 मई 1980 में साउथैंपटन में हुआ था। उनके पिता का नाम यशवीर सुनक है जिनका शुरुवाती जीवन केन्या में बीता। ऋषि की माता हिंदुस्तानी मूल की है, उनकी माता की परवरिश तंजानिया में हुई। वहीं अगर हम ऋषि सुनक के दादा दादी के बारे में बात करें तो वे अंडिवाइडेड इंडिया के पंजाब प्रांत से ताल्लुक रखते है। 1960 के दशक में ऋषि के माता पिता ब्रिटेन आ गए थे तभी से वे सपरिवार ब्रिटेन में रहते हैं। ऋषि सुनक की पत्नी का नाम अक्षता है। अक्षता के पिता और ऋषि के ससुर भारत में इनफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति है। ऋषि की कृष्ण और अनुष्का नाम की  दो बेटियां है।

वेटर से प्रधानमंत्री तक का सफर

ऋषि के मिडिल क्लास फैमिली से ताल्लुक रखते थे। उनके माता पिता बहुत ही साधारण जीवन यापन करने वाले रहेभाई। ऋषि की प्रारंभिक शिक्षा हैम्पशायर और विंचेस्टर में हुई। भले ही ऋषि आज करोड़ों रुपयों की संपत्ति के मालिक क्यों न बन गए हो लेकिन एक उनके जीवन में एक वक्त ऐसा भी आया था  आज जब उनके पास  अपने स्कूल की  फीस भरने तक के लिए पैसे नहीं थे।  ऐसे में जब उन्हें कोई रास्ता नहीं सूझा तो उन्होंने विंचेस्टर के एक होटल में वेटर का काम भी किया और तब जाकर अपने स्कूल की फीस भरी।

ऋषि बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। हाई स्कूल में ऋषि अपने स्कूल द्वारा प्रकाशित किए जाने वाले अखबार के संपादक होने के साथ ही स्कूल के हैडबॉय भी रहे। ऋषि की रुचि लेखन में भी है अपने लेखन का शौक पूरा करने के लिए उन्होंने  तीन पुस्तके भी लिखी है जो की प्रकाशित भी हो चुकी है। ऋषि ने विश्व की नामी यूनिवर्सिटीज  स्टैनफोर्ड और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से राजनीतिक विज्ञान, दर्शनशास्त्र और अर्थशास्त्र में डिग्री हासिल की है।

ऋषि सुनक के इरादे

ऋषि सुनक एक लड़ाके हैं। अभी दो महीने पहले ही प्रधानमंत्री पद की दौड़ में वे लिज ट्रस से 58 के मुकाबले 42 प्रतिशत वोटों से पिछड़ गए थे। बड़े-बड़े वादे करके सत्ता में आई लिज ट्रस ने डेढ़ महीनों में ही घुटने टेक दिए। पार्टी ने इस बार पिछली बार के रनर अप ऋषि सुनक पर दांव खेला और उन्हें अपना नेता चुन लिया। 357 पार्टी सांसदों में से करीब 200 ने सुनक के पक्ष में अपना मत जताया।

ऋषि सुनक ने नेता चुने जाने के बाद पहले ही ट्वीट में अपने इरादे जाहिर कर दिए। उन्होंने लिखा कि, ब्रिटेन के लिए ये मुश्किल दौर है और आने वाले कल में कठिन फैसलों के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि उनके सामने देश और पार्टी को एकजुट रखने की सबसे बड़ी चुनौती है।

यहां ये जानना बहुत जरूरी है कि, सुनक जब ब्रिटेन के वित्त मंत्री थे तो उनकी नीतियों के चलते देश के आम नागरिक को भी बेहतरीन और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं मिल पाईं और कोविड महामारी के कठिन दौर से बाहर आने में मदद मिल सकी। वे गरीबों को राहत और अमीरों पर ज्यादा टैक्स लगाने की नीति के समर्थक माने जाते हैं।

 

कांटों की राह और चुनौतियों की भरमार

ऋषि सुनक को उनके जुझारू नेतृत्व के लिए जाना जाता है। दबाव में संघर्ष उनके व्य़क्तित्व की खासियत है। ब्रिटेन में इस समय महंगाई चरम पर है। देश पर 40 बिलियन पाउंड का कर्ज है। एक रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि, देश के करीब 14 मिलियन लोग दो समय के खाने के लिए मोहताज हो गए हैं। सर्दियां आने वाली हैं और ब्रिटेन में बिजली के दाम आसमान पर हैं। बिजली इतनी महंगी हो गई है कि वहां घरों को गर्म रख पाना भी बहुत खर्चीला काम हो गया है। अखबारों में कहा जा रहा है कि नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती ‘ईटिंग और हीटिंग’ की जंग को जीतने की होगी।

 

सुनक के लिए एक बड़ी चुनौती अपनी ही पार्टी के विरोधियों को साधने की है। कंजरवेटिव पार्टी को उसके दक्षिणपंथी नजरिए के कारण जाना जाता है। किसी गैर गोरे पर पार्टी का भरोसा अपने आप में विलक्षण है। अपनी रेसिस्ट और पारंपरिक सोच के कारण पिछले चुनावों में लिज ट्रस को सुनक के मुकाबले वरीयता दी गई थी। कंजरवेटिव पार्टी का नजरिया रातों-रात बदल गया हो ऐसा भी नहीं है। ब्रिटेन इस वक्त जैसे हालात से गुजर रहा है दरअसल सभी जानते हैं कि यहां की सत्ता कांटों का ताज है और उस ताज को स्वीकारने की हिम्मत ऋषि ने दिखाई है। उनके मुकाबले वाले उम्मीदवार इतने कमजोर थे कि उनके लिए 25 सांसदों का समर्थन जुटा पाना भी मुश्किल था।

 

विरोधियों के साथ-साथ मीडिया ट्रायल का भी संकट

ऋषि सुनक गैर गोरे हैं और गोरी चमड़ी वालों के देश में उनका प्रधानमंत्री बनना ही अपने आप में एक चुनौती है। उनके हर काम पर विपक्ष के साथ अपनी पार्टी के विरोधियों और दक्षिणपंथी मीडिया की कड़ी नजर रहेगी। सफल रहे तो ठीक वरना ऋषि की असफलता आगे के गैर ब्रिटिश मूल के राजनेताओं की स्थिति को भी कमजोर करेगी और नजीर सुनक की पेश की जाएगी।

 

लंदन के सिने इंक के निदेशक और पूर्व में बीबीसी हिंदी सेवा से जुड़े पत्रकार परवेज आलम के अनुसार, ऋषि सुनक के लिए आने वाले दिनों में सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक मोर्चे से जूझने की है। कारोबार को पटरी पर लाना और सरकारी खर्च को नियंत्रण में रखना होगा। संभव है कि कोविड दौर में भारी मुनाफा कमाने वाली बिजली कंपनियों को ज्यादा टैक्स भरना पड़े और बिजली के दाम में राहत देने के लिए दबाव बढ़ाया जाए।

 

सिने इंक के पत्रकार विजय राणा के अनुसार, ब्रिटेन ब्रैक्सिट से बाहर आ गया है और व्यापार के मोर्चे पर वह अलग-थलग पड़ा है। भारत के साथ कारोबार की असीम संभावनाएं हैं और ब्रिटेन के लिए भारत के साथ कारोबारी रिश्तों को मजबूत करना उसकी मजबूरी भी है। अब देखना ये होगा कि दोनों देश इन हालात का कैसे फायदा उठा पाते हैं।

मोदी की बधाई और ससुर का आशीर्वाद

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुनक को बधाई देते हुए ट्वीट किया है कि, भारत और ब्रिटेन के ऐतिहासिक रिश्तों को आधुनिक साझेदारियों में बांधने का वक्त आ गया है। ऋषि सुनक को बधाई।

 

विजय राणा कहते हैं कि, प्रधानमंत्री के बधाई संदेश से ही साफ है कि भारत बदली परिस्थितियों में ब्रिटेन के साथ मिल कर काम करना चाहता है।

 

ऋषि सुनक की पत्नी अक्षता के पिता और उऩके ससुर भारत में इनफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति का अपने दामाद को बधाई देते हुए किया गया ट्वीट भी कम दिलचस्प नहीं है। उन्होंने लिखा कि, ऋषि को बधाई। हमें आप पर गर्व है। उम्मीद है कि आप अपने देश को अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करेंगे।

42 साल के ऋषि सुनक एक प्रैक्टिसिंग हिंदू हैं। वे अपनी मेज पर हमेशा गणेश जी की मूर्ति रखते हैं। भारतीय त्यौहारों और परंपराओं को निभाना उन्हें पसंद हैं। उऩकी दो बेटियां हैं। उन्होंने ऑक्सफोर्ड और स्टेनली से पढ़ाई की है। राजनीति में उऩका अनुभव पुराना नहीं है। देखना ये होगा कि इस नौसिखिए के दांव से ब्रिटेन अपनी समस्याओं के भंवरजाल से कहां तक मुक्त हो पाता है।


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