सुपर एक्सक्लूसिव! हरीश रावत हो सकते हैं कांग्रेस के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष

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 देहरादूनः राहुल गांधी के इस्तीफा देने के बाद से ही नये कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए लगातार चर्चाएं चल रही थी। बुधवार को अब चूंकि राहुल गांधी ने औपचारिक रूप से इस्तीफे का ऐलान कर दिया है कि वे अब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं हैं। इसके बाद से अटकलों का बाजार गर्म है कि अगले अध्यक्ष कौन होंगे। हालांकि फिलहाल कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोतीलाल बोरा को अंतरिम अध्यक्ष बनाने की बात कही जा रही है। वहीं इस बीच अब इस दौड़ में हरीश रावत को बताया जा रहा है कि वे भी अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं। बताते चलें कि हरीश रावत उत्तराखंड के कांग्रेस को वो कद्दावर नेता हैं जिन्होंने 1980 में बीजेपी के नेता मुरली मनोहर जोशी को संयुक्त राज्य के दौरान हराया था। हरीश रावत उत्तराखंड के कद्दावर नेताओं में शुमार किए जाने वाले ऐसे राजनीतिज्ञ माने जाते हैं, जो अपने प्रतिद्वंदियों से मात खाने के बाद हर बार और मजबूत होकर उभरे। रावत पर्वतीय राज्य से पांच बार सांसद रहे और 2012— से 2014 के दौरान मनमोहन सिंह की सरकार में जल संसाधन मंत्री बनाया गया। रावत इंडियन यूथ कांग्रेस के सदस्य थे और उनके राजनीतिक करियर ने उस वक्त उड़ान भरी जब उन्होंने सातवें लोकसभा चुनाव के दौरान साल 1980 में अल्मोड़ा संसदीय सीट पर भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता मुरली मनोहर जोशी को शिकस्त दी थी। उसके बाद उन्हें आठवीं और नौवीं लोकसभा चुनावों में भी जीत हासिल हुई।


वह साल 2000 में उस वक्त राज्य पार्टी ईकाई के अध्यक्ष बनाए गए जब उत्तराखंड को उत्तर प्रदेश से अलग किया गया। साल 2002 में वह राज्यसभा के सदस्य चुने गए। साल 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान अनुसूचित जाति के लिए सीट रिजर्व होने के चलते उन्हें अपनी पारंपरिक अल्मोड़ा सीट छोड़नी पड़ी। उसके बाद रावत हरिद्वार लोकसभा सीट के चुनावी मैदान में उतरे। उन्होंने बीजेपी के स्वामी यतिश्वरानंद गिरी को तीन लाख से भी ज्यादा वोटों के अंतर से मात दिया। रावत को साल 2014 में उस वक्त मुख्यमंत्री बनाया गया जब उनके पार्टी सहयोगी विजय बहुगुणा पर जुलाई 2013 में आई प्राकृतिक आपदा को ठीक तरह से हैंडल नहीं करने का आरोप लगा। इसके साथ ही, विजय बहुगुणा पर वित्तीय फंड में अनियमितताओं के भी आरोप लगाए गए। 69 वर्षीय रावत अगले साल धारचुला सीट से उप—चुनाव जीत गए। रावत सरकार को उस वक्त बड़ा झटका लग जब कांग्रेस के नौ विधायकों ने उनके खिलाफ साल 2016 में मोर्चा खोल दिया। पार्टी संकट के बीच राज्य में 27 मार्च 2016 को राष्ट्रपति शासन लगाया गया। सभी बागी विधायकों ने बीजेपी से ज्वाइन कर पार्टी के लिए मुसीबतें खड़ी कर दी। रावत 2017 के विधानसभा चुनावों में हरिद्वार रूरल और किच्छा दोनों जगहों से हार गए। कांग्रेस को उनके नेतृत्व में वहां की 70 सीटों में से सिर्फ 11 सीटें ही हासिल हो पाई जबकि बीजेपी ने 57 पर विजयी हासिल की। राव के कार्यकाल को स्टिंग ऑपरेशन वाले वीडियो के लिए भी जाना जाता है, जिसमें कांग्रेस के बागी विधायकों को वापस पार्टी में लाने के लिए डील करते हुए देखा गया। बाद में उन्होंने यह माना था कि वह उस वीडियो में थे।


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