वक्फ बोर्ड नहीं करता सज्जादा नियुक्त: सज्जादा परिवार

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वक्फ बोर्ड से सूचना के अधिकार के तहत मिली सूचना को आधार बनाकर दरगाह के सज्जादा नशीं को लेकर कुछ लोगों ने सवाल उठाए है। वहीं सज्जादा नशीं का कहना है कि साढ़े पांच सौ साल से दरगाह में सज्जादा नशीं है, वक्फ बोर्ड ही 1971 में अस्तित्व में आया है।
देहरादून के चंद्रलोक कालोनी निवासी सूफी खलीक ने सूचना के अधिकार के तहत वक्फ बोर्ड से कुछ सूचना मांगी थी। वक्फ निरीक्षक मोहम्मद अली ने बताया कि दरगाह पिरान कलियर में बोर्ड की ओर से सज्जादानशीं, सहायक सज्जादा नशीं आदि को नियुक्त नहीं किया गया है ऐसे में उन्हें भुगतान किए जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। इस सूचना को आधार बनाकर कुछ लोगों ने सज्जादा नशीं को लेकर सवाल उठाए है।


वहीं सज्जादा नशीं के साहिबजादे शाह अली शाह एजाज साबरी ने कहा कि सज्जदानशीं बनाने का अधिकार का वक्फ बोर्ड को नहीं है। वक्फ बोर्ड तो 1972 में ही अस्तित्व में आया है। जबकि उनका दरगाह से नाता साढ़े पांच सौ से अधिक साल पुराना है। दरगाह की तमाम रस्में सज्जादा नशीं शाह मंसूर एजाज साबरी के की देखरेख में ही होती है। वक्फ बोर्ड से उनका पुराना विवाद है।


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