लोकजन टुडे के “कोर समिति” के सदस्य तनुज वालिया को मिला उत्कर्ष प्रदर्शन सम्मान

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लोकजन टुडे: हरिद्वार:
नारद जयंती आयोजन समिति के तत्वाधान में नारद जयंती के उपलक्ष में आयोजित पत्रकार सम्मान समारोह में आज लोकजन टुडे के कोर टीम के सदस्य वरिष्ठ पत्रकार तनुज वालिया को पत्रकारिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए नारद जयंती पर सम्मानित किया गया जो निश्चित ही बड़े गर्व की बात है और लोकजन टुडे के समस्त परिवार की तरफ लोकजन टुडे का नाम रोशन करने के लिए कोर टीम के सदस्य तनुज वालिया को ढेर सारी बधाई … इस अवसर पर समाचार पत्रों की अहमियत और पत्रकारों की स्थिति पर पांचजन्य के संपादक वरिष्ठ पत्रकार हितेश शंकर ने कहा कि जिस प्रकार बलात्कार की पीड़िता की पहचान बताना गैरकानूनी है। उसी प्रकार आधी अधूरी व असत्य समाचारों का प्रसार प्रकाशन भी अपराध की श्रेणी में आना चाहिए। पत्रकारिता या पक्षकारिता में अंतर होना चाहिए।
प्रेस क्लब सभागार में आयोजित कार्यक्रम में श्री शंकर ने कहा कि देश मे आधा अधूरा सत्य पसोसने की लत लग गई है।किसी भी छोटी से छोटी घटना को सनसनी बनाने के लिए झूठ का बखान किया जा रहा है। रोहित बेमुला की आत्महत्या को दलित उत्पीड़न से जोड़कर प्रसारित किया गया। जबकि रोहित दलित था ही नही। इसी तरह छोटी बचत के खातों के खाली होनी की झूठी खबर फैलाई गई, अखलाक की हत्या पर दादरी जाने वाले अरविंद केजरीवाल, डॉ नारंग की हत्या पर दिल्ली में ही नही जाते। जुनैद हत्याकांड को भो खाने के विषय से जोड़ दिया। जबकि बंगाल में 78 वर्षीय नन के बलात्कार के विषय मे नजरुल का नाम आने पर खबरें तुरन्त बंद कर दी गई । ऐसी खबरों के प्रति किसकी जिम्मेदारी है। मीडिया संस्थानों को असत्य व अधूरी खबरों के लिए उत्तरदायी होना चाहिए। श्री हितेश शंकर ने कहा कि वर्तमान में फेक न्यूज को एक साधारण से मोबाइल फोन से रोकने का प्रयास किया है। आज सौ करोड़ के न्यूज चैनल को चार हजार के मोबाइल से ट्यूट करके झूठ का पर्दाफाश कर सकते है।मुख्य वक्ता लोकसभा टीवी के एंकर अनुराग पुनेठा ने वर्तमान पत्रकारिता को देवर्षि नारद जी से जोड़ते हुए कहा कि नारद जी ने खबरों की तटस्थ रिपोर्टिंग की जाति धर्म प्रभावित ना हो कर, दंडी मार पत्रकारिता से परे हटकर कार्य किया। नारद जी के विचारों से व्यक्ति भीतर तक प्रभावित होता था। पत्रकारों की विश्वसनीयता वर्तमान में चिंतनीय है। सूचनाओं का विकृतिकरण हो रहा है। उन्होंने कहा कि 2002 से 2005 के बीच टीवी पर आने वाले पत्रकारों को जनता पहचानती थी और सम्मान देते थे। किंतु आजकल टीवी पत्रकारों का सम्मान गिरा है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की विश्वसनीयता बनी रहनी चाहिए इसके लिए आवश्यक है कि नारद जी के चरित्र को पत्रकारों को अपना आदर्श बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजकल खबरों व सूचनाओं का जातिकरण और राजनीतिकरण हो गया है। उन्होंने कहा कि किसी महिला का बलात्कार होता है और यदि वह महिला किसी जाति धर्म से आती है तो जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर उस पूरे समाचार को नमक मिर्ची लगा कर प्रस्तुत किया जाता है। जबकि यदि महिला सामान्य वर्ग से होती है तो यह छोटी सी खबर बन कर रह जाती है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को खबरों को प्रस्तुत करने में शब्दों का चयन तो अच्छा होना चाहिए। किंतु सत्यता से परे नहीं होना चाहिए। कार्यक्रम के अध्यक्ष उत्तराखण्ड ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.ओमप्रकाश सिंह नेगी ने कहा कि नारद जी की व्यवस्था पूरी संचार तंत्र से जुड़ी थी। वे लोक कल्याण के लिए सदैव चिंतित रहते थे। ब्रह्म लोक में नारद की एक मात्र संचार का माध्यम थे। एक दूसरे से संवाद के रूप में नारद जी की भूमिका महत्वपूर्ण होती थी। विशिष्ट अतिथि संदीप चौधरी ,राज कुमार शर्मा व प्रदीप शर्मा ने भी नारदजी के जीवन को आदर्श मानने की बात कही। अतिथियों का स्वागत समिति के अध्यक्ष डॉ शिवशंकर जायसवाल ने व अतिथियों का परिचय डॉ रजनीकांत शुक्ला ने किया। कार्यक्रम का संचालन अमित शर्मा व आभार सयोजक देवेश वशिष्ठ ने व्यक्त किया।


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