लीची से हो रहा है चमकी बुखार! जिस बुखार ने बिहार में ली कई बच्चों की जान
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देहरादून की लीची अपने स्वाद के लिए काफी प्रसिद्ध है। देहरादून की लीची का एक बड़ा बाजार भी है। इस बार लीची से चमकी बुखार की खबरों के बावजूद देहरादून की लीची के बाज़ार में कोई कमी नहीं आई है। लीची के खरीददार और लीची का कारोबार करने वालों ने इसे अफवाह करार दिया है। जानकार भी इस मामले को केवल कोरी अफवाह बता रहे हैं।
उत्तराखण्ड राज्य लीची उत्पादको में एक बड़ा राज्य है। राजधानी देहरादून सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में लीची का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। लीची खाने से बिहार में बच्चों को चमकी बुखार की खबरों को जानकर अफवाह करार दे रहे हैं। दून मेडिकल कॉलेज के सीनियर डॉक्टर चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. एनएस खत्री ने कहा कि कोई फल खाने से या लीची खाने से इस तरह की बीमारी नहीं होती है। उन्होंने कहा कि इस तरह का जो वायरल है उसको लेकर जो बातें सामने आ रही है वह ठीक नहीं है। डॉक्टर खत्री साल 2004 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मौजूद थे जब दिमागी बुखार से एक हज़ार बच्चों की जान चली गई थी। डॉक्टर खत्री ने इस मामले में कहा कि इससे बचाव के उपायों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। गोरखपुर क्षेत्र में बचाव के कारणों पर अधिक फोकस किया गया है। यही वजह है कि वहां पर इस बीमारी की रोकथाम में सफलता मिली है। सम्भवतः बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में जहां पर बच्चों की मौत के मामले आए हैं वहां पर भी गोरखपुर की तरह ही बचाव के तरीके पर अधिक फोकस करने की जरूरत है।
इस मामले में उद्यान स्पेशलिस्ट डॉ. डीके तिवारी ने कहा कि लीची खाने से बिहार में बच्चों को चमकी बुखार नहीं हुआ है। लीची खाने से कोई बीमारी नहीं होती है और सालों से लोग लीची खा रहे हैं। पहले आखिर इस तरह की बीमारी क्यों नहीं हुई। अभी तक ऐसा कोई शोध नहीं आया है जिससे इस बात का पता चले कि लीची खाने से इस बीमारी को बढ़ावा मिला है। हालांकि उन्होंने यह बात जरूर माना कि इस फल में कहीं से कोई मिलावट की वजह से जरूर कुछ दिक्कत हो सकती है। या फिर पेड़ों पर अधिक कैमिकल के छिड़काव की वजह से ये फल ऐसा हो गया हो। इससे बीमारी फैली हो हालांकि वो इस बात से पूरी तरह से इनकार कर रहे हैं कि लीची खाने से कुछ ऐसी बीमारी हो सकती है।
लीची को लेकर अफवाह के बावजूद भी लोग जमकर इसकी खरीदारी कर रहे हैं। राजधानी देहरादून में लोगों ने इस थ्योरी को दरकिनार कर दिया है कि लीची खाने से बच्चों को चमकी बुखार हो रही है। वहीं लीची का कारोबार करने वाले भी साफ तौर पर यही कह रहे हैं कि इससे उनकी बिक्री पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। लोग एक रूटीन के तहत लीची की खरीदारी कर रहे हैं। रागनी देहरादून में अभी तक लीची खाने के बाद किसी की तबीयत बिगड़ने और किसी को बुखार जैसी स्थिति को लेकर कोई खबर नहीं है। आम लोग भी इस बात को मान रहे हैं कि लीची खाने से किसी तरह की कोई परेशानी हो रही है।
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