कोविड-19 महामारी के इलाज के उद्देश्य से विशेष तौर से डिजाईन किये गये ’प्राण वायु’ वेन्टिलेटर को एम्स ऋषिकेश ने सफल करार दे दिया है। कई बीमारियों में परीक्षण करने के बाद एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने इसकी प्रमाणिकता की पुष्टि कर दी है। निर्माण के बाद इस वेन्टिलेटर का मेडिकल क्षेत्र में उपयोग किया जा सकेगा।
’प्राण वायु’ नाम के इस वेन्टिलेटर के आविष्कार में आईआईटी रुड़की के इंजीनियरों और एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञ चिकित्सकों की संयुक्त भूमिका रही है। इस वेन्टिलेटर का आविष्कार ढाई महीने पहले अप्रैल महीने में हुआ था। लैबोरेट्री स्तर पर पहले इस वेन्टिलेटर का कई बार टेस्ट हो चुका है। और अब एम्स ऋषिकेश ने भी विभिन्न बीमारियों में इसका परीक्षण कर मेडिकल स्तर पर इसकी प्रमाणिकता की पुष्टि कर दी है। बतादें कि हाल ही में 5 सदस्यीय विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने एम्स की एडवान्स सिमुलेशन लैब में इस वेन्टिलेटर का परीक्षण किया है। परीक्षण में एम्स के विशेषज्ञ डाॅक्टरों ने विभिन्न बीमारियों में इस वेन्टिलेटर की तकनीकी और मेडिकली प्रणाली के उपयोग की जांच की। परीक्षण के दौरान वेन्टिलेटर की सभी कार्यप्रणालियों की गहन जांच की गई। जांच के उपरान्त टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची कि यह वेन्टिलेटर गहन चिकित्सा के दौरान विभिन्न बीमारियों में सभी तरह से लाभदायक है। जांच में खरा उतरने के बाद एम्स ऋषिकेश ने इसकी विश्वसनीयता पर अपनी मुहर लगा दी है। निदेशक एम्स, पद्मश्री प्रोफेसर रविकान्त ने परीक्षण की सफलता पर टीम के सभी चिकित्सकों को बधाई दी। एम्स के मेडिकल सुपरिटेन्डेन्ट प्रोफेसर यूबी मिश्रा ने इस बारे में बताया कि आईआईटी रुड़की के साथ एम्स ऋषिकेश की यह संयुक्त उपलब्धि निःसन्देह रोगियों का जीवन बचाने के लिए वरदान साबित होगी।
प्राण वायु की विशेषता-
कोविड एआरडीएस के उपचार मे लाभकारी यह वेन्टिलेटर बहुत कम लागत में तैयार किया जा सकता है। अत्याधुनिक तकनीक और सुविधाओं से सुसज्जित प्राण-वायु वेन्टिलेटर स्वचालित प्रक्रिया से सांस लेने और छोड़ने के अनुरुप को नियन्त्रित करता है। आईसीयू में भर्ती मरीजों के लिए यह वेन्टिलेटर जीवन रक्षक के तौर पर मददगार साबित होगा। टीम ने इसकी शुरुआती कीमत करीब 25 हजार आंकी है, जबकि बाजार में उपलब्ध वेन्टिलेटर लाखों रुपये कीमत के हैं।
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