पुलिस के फरमान से ई रिक्शा चालक परेशान

Share your love

कुलदीप रावत

एक ओर जहां सरकार पर्यावरण को दूषित होने से बचाने के लिए कड़े कदम उठाने की बात कर रही है और 2022 तक पचास प्रतिशत ई वाहनों को सड़क पर लाने की बात कर रही है तो वही उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के ई रिक्शा मुख्य सड़कों से गायब हो चुके हैं,इसका मुख्य कारण पुलिस का फरमान है जिसके तहत ई रिक्शा चालक शहर के मुख्य सड़को पर नही चल सकते वो सिर्फ गलियों में ही चल सकते हैं, पुलिस के अनुसार पुलिस ने ये कदम ट्रैफिक जाम से बचने के लिए किया था लेकिन असल में इसका कोई साफ परिणाम नजर नहीं आ रहा जाम की स्थिति शहर में और भी बदतर हो गई है पुलिस अभी तक समझ नहीं पा रही है राजधानी देहरादून में ई रिक्शा जाम का कारण नहीं है बल्कि राजधानी के स्कूल और गलत पार्किंग इसका मुख्य कारण है ई रिक्शा चालकों ने पुलिस और सरकार पर आरोप लगाया है राजधानी देहरादून के ऑटो विक्रम और सिटी बस मालिकों के दबाव में पुलिस ने यह निर्णय लिया है पुलिस और सरकार यदि चाहती तो यह निर्णय धड़ल्ले से चल रहे विक्रम चालकों पर भी कर सकती थी इस वक्त राजधानी में सबसे ज्यादा प्रदूषण सिटी बस और विक्रम के कारण होता है

इतना ही नहीं यातायात पुलिस के द्वारा ई रिक्शा चालकों को सख्त निर्देश दिए हैं आप राजधानी के मुख्य सड़कों पर सिर्फ रात को ही निकल सकते हैं पुलिस के इस नए फरमान के बाद ई रिक्शा चालकों ने आज पुलिस और सरकार के खिलाफ एकत्र होकर हल्ला बोल दिया।
-एक ओर सरकार के पर्यावरण को बचाने के लिए ई वाहनों में बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा था।
कुछ समय पहले खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिह रावत ने एक योजना के तहत लोन पर इन ई रिक्शा चालको को ई रिक्शा भेंट किये थे पर आज सरकार के इस फरमान के बाद सैकड़ो लोगो पर रोजी रोटी का संकट गहरा गया है।सरकार के इस फरमान का पर तर्क ये है कि ई रिक्शा चालकों की वजह से शहर भर में जाम लगता है।ई रिक्शा चालकों का कहना है कि रात को सवारियां मिलना ना के बराबर है और ऐसे में उनको ई रिक्शे की किश्त भी जमा करने के लाले पड़ गए हैं,और समय पर किश्त जमा ना होने से बैंक के नोटिस उनको मिल रहे हैं और उनको किश्त जमा न होने की दशा में बैंक द्वारा उनके घर का सामान बेच दिया जाएगा।मतलब साफ है सरकार के इस फैसले के बाद ई रिक्शा चालको पर न केवल रोजी रोटी का संकट आ गया है बल्कि अब उन पर घर बचाने का भी संकट पैदा हो गया है।ई रिक्शा संचालको का आरोप है कि अगर सरकार को उनको चलने को बैन ही करना था तो उनका पंजीकरण ही नही करना चाहिए था साथ ही या तो सरकार उनको चलने की परमिशन दे या फिर उनके लोन को माफ कर उनके द्वारा दी गयी राशि वापस की जाय जिससे वह अन्य काम कर सके।

वही इस मामले में कांग्रेस भी ई रिक्शा चालकों के समर्थन में खड़ी हो गई है कांग्रेस ने सरकार को घेरा,कांग्रेस के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या इनकी रोजी रोटी की हो गयी है क्योंकि जब इन लोगो के ई रिक्शे दिए गए तब सरकार ने इनके लिए कोई नियम नही बनाया और जब तीन हजार से ज्यादा ई रिक्शे शहर में बांट दिए तो उसकी वाहवाही लूटने लगे और अच्चानक तुगलगी फरमान जारी कर दिया जिससे तीन हजार लोगों की रोजी रोटी खतरे में पड़ गयी,सभी गरीब लोग हैं और सभी परेशान हैं सरकार ने इनकी रोजी रोटी छिनने का काम किया है।कल इस मामले में राज्य परिवहन विभाग से बात की जायगी और इनकी समस्या को उनके समक्ष रखा जाएगा।


Discover more from Lokjan Today

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *