देहरादून के सुस्त थानेदारों की अब खैर नहीं, जानिए कैसे?

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देहरादून – उत्तराखंड सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फेर बदल किया है। अब तक देहरादून एसएसपी की कमान संभाल रही निवेदिता कुकरेती को हटाकर वरिष्ठ आईपीएस अरुण मोहन जोशी को राजधनी देहरादून की कमान सौंपी है। खबर सुनते ही आईपीएस अरुण मोहन जोशीे हरिद्वार से देहरादून के लिए रवाना हुए और पीएचक्यू में डीजीपी अनिल रतूड़ी से मुलाकात की। आईपीएस अरुण मोहन जोशी कल सुबह देहरादून के कप्तान का कार्यभार ग्रहण करेंगे। इस खबर की भनक लगते ही सुस्त थानेदार व पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया। आईपीएस अरुण मोहन जोशी 2006 बैच के पुलिस अधिकारी हैं उनकी छवि सिंगम की तरह है, वे सुस्त पुलिसकर्मियों व थानेदारों को तुरन्त लाइनहाजिर करवाते हैं। यही कारण है कि उनको शासन ने देहरादून के कप्तान की कमान सौंपी है।

कौन है आईपीएस अरुण मोहन जोशी?

आईपीएस अरुण मोहन जोशी उत्तराखंड और हिमाचल से सटे एक छोटे से गांव में जन्मे 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। अरुण मोहन जोशी अपनी पहली पोस्टिंग में ही लोगों की पसंद बन गये। अरुण रुड़की आईआईटी से पासआउट हैं और एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। पिता सरकारी नौकरी में थे लिहाजा उनका एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर होता रहता था। तीन भाई और एक बहन वाले इस परिवार में अरुण मोहन जोशी IPS बने। पिता की बदौलत ही अरुण आईपीएस बने हैं क्योंकि क्योंकि जब वो बहुत छोटे थे तब उनकी मां का देहांत हो गया था। मां का प्यार ठीक से मिल नहीं पाया और पिता ने प्यार में कोई कमी नहीं की।

आपको बता दें कि 5 साल की सर्विस के बाद ही अरुण मोहन जोशी को हरिद्वार का SSP बना दिया गया था। इससे पहले वह उत्तरकाशी के SP रह चुके थे। उससे पहले रुड़की ASP और कुमाऊं में भी कई जगह अपनी सर्विस दे चुके थे। अरुण मोहन जोशी को लोग इसलिए भी पसंद करते हैं क्योंकि वह उत्तराखंड के उस समय सबसे युवा IPS थे और उनके काम करने की शैली बहुत अलग थी।

हर घटना-दुर्घटना पर उनका हर समय पहुंच जाना ही लोगों को खूब पसंद आ रहा था। उनके काम की तारीफ ना केवल उनका डिपार्टमेंट कर रहा था बल्कि जिस जगह पर वह तैनात होते वहां की जनता का रुख़ भी उन्हीं की तरफ हो जाता। हरिद्वार में SSP रहते हुए उन्होंने कुछ ऐसे काम किए जिनको लोग आज भी नहीं भूल पाते हैं।

हरिद्वार में साल में लगने वाले दो कांवड़ मेलों के दौरान जोशी ने ही पहली बार शहर में हजारों वाहनों की पार्किंग की ऐसी व्यवस्था की थी जिसको लोग और प्रशासन आज भी फॉलो कर रहे हैं। इतना ही नहीं मुंबई में CST रेलवे स्टेशन से हुई एक बच्ची की गुमशुदगी ने पूरे देश में हल्ला मचा दिया था, तब अरुण जोशी के ही कार्यकाल में उस बच्ची को ना केवल हरिद्वार से बरामद किया गया था बल्कि आरोपी को भी हरिद्वार पुलिस ने ही गिरफ्तार किया था। तब अरुण मोहन जोशी नेशनल और इंटरनेशनल मीडिया की सुर्खियों में आ गए थे।

अब देखना ये होगा कि आईपीएस अरुण मोहन जोशी देहरादून में सुस्त रवैए के थानेदारों व पुलिसकर्मियों की चाल में किस तरह से गति लाते हैं।


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