कुलदीप रावत

उत्तराखंड के चारधाम यात्रा को श्राइन बोर्ड की तर्ज पर चारधाम श्राइन बोर्ड बनाने को लेकर उत्तराखंड मंत्रिमंडल के मंजूरी देने के बाद तीर्थपुरोहितों समाज अपने हक हकूब को लेकर विरोध शुरू करने लग गया है यही नहीं तीर्थपुरोहितों ने चारधाम श्राइन बोर्ड बनाने के खिलाफ सत्र के दौरान विधानसभा घेराव की भी चेतावनी दे दी है।
आखिर क्यों कर रहे हैं विरोध तीर्थ पुरोहित समाज
तीर्थ पुरोहित समाज का असली विरोध बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर में अपने हक को लेकर है हक का तात्पर्य मंदिर में चढ़ाया जाने वाला दान जिसका एक भाग सीधा तीर्थ पुरोहित समाज को जाता था हालांकि तीर्थ पुरोहित समाज इसकी कुछ और ही वजह बता रहा है लेकिन असल मुद्दा यही है श्राइन बोर्ड बन जाने के बाद तीर्थ पुरोहित समाज श्राइन बोर्ड का कर्मचारी हो जाएगा कर्मचारी बन जाने के बाद तीर्थ पुरोहित समाज कानून और कायदे से बंध जाएंगे जो यह होना नहीं देना चाह रहे श्राइन बोर्ड बन जाने के बाद चार धाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं को वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड तिरुपति बालाजी श्राइन बोर्ड की तर्ज पर सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी हालांकि तीर्थ पुरोहित समाज तिरुपति बालाजी श्राइन बोर्ड और चार धाम श्राइन बोर्ड को लेकर यह तर्क दे रहा है दोनों ही जगह की भौगोलिक स्थितियां अलग है लेकिन सबसे सुव्यवस्थित वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के सवाल पर चुप हो जा रहा है
हालांकि वैष्णव देवी और तिरुपति की तर्ज पर बनने वाले चारधाम श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे। यही नहीं इस बोर्ड में प्रदेश के 51 मंदिरो को शामिल किया गया है। उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा अब बेहतर सुविधाओं में नजर आएगी। चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं को और दुरूस्त करने और यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा देने को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। बीते दिनों सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में जम्मू-कश्मीर में बने श्राइन एक्ट के तर्ज पर उत्तराखंड चारधाम बोर्ड विधेयक – 2019 को मंजूरी दे दी थी। जिसके अध्यक्ष प्रदेश के मुख्यमंत्री होंगे और बोर्ड का सीईओ, शासन के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को बनाया जायेगा। उत्तराखंड चारधाम के लिए चारधाम श्राइन बोर्ड बनाने का मकशद चारधाम की व्यवस्थाओ को दुरुस्त करने है। वही ज्यादा जानकारी देते हुए चारधाम विकास परिषद उपाध्यक्ष शिव प्रसाद मंमगाई ने बताया कि इस एक्ट का स्वरुप है की इसके माध्यम से यात्रियों के लिए खाने पीने, रहने और दर्शन करने में कोई असुविधा ना हो, चारों धामों का प्रसाद सभी के हाथो में पहुंचे, इसके सम्बंधित प्रावधान है यानि चारधाम की व्यवस्थाओ को सुव्यवस्थित किया जा सके जिससे चारधाम आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ेगी। साथ ही इस बोर्ड काम मुख्य रूप से नीति बनाना, बजट आवंटन करना, प्रबंधन हेतु मुख्य कार्यकारी अधिकारी को दिशा-निर्देश, प्रबंधन तंत्र का आधुनिकरण और चारधाम स्थित मंदिर और परिसर का विकास करना है।– उत्तराखंड चारधाम यात्रा में वर्तमान समय में संचालित परंपरा करीब 80 साल पुरानी है क्योकि साल 1939 में बदरी-केदार मंदिर समिति के लिए अधिनियम लाया गया था। तब से लेकर अभी भी बदरी-केदार मंदिर समिति का अधिनियम चल रहा है। अब देखना होगा तीर्थ पुरोहित समाज का यह विरोध प्रदर्शन क्या सरकार के इस फैसले को बदल पाएगा क्योंकि पूर्ण बहुमत की त्रिवेंद्र सरकार चार धाम श्राइन बोर्ड बनाने को लेकर मन बना चुकी है
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