उत्तराखंड आने वाले कांवड़ियों को है खतरा

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कुलदीप रावत

उत्तराखंड में होने वाली कावड़ मेला 17 जुलाई से शुरू होने जा रहा है. उत्तराखंड पुलिस और प्रशासन के लिए कांवड़ यात्रा इस बार बड़ी चुनौती साबित गई है इस बार लक्ष्मण झूला के बंद हो जाने से बड़ी समस्या उत्पन हो गई है मुंबई आई आई टी की रिपोर्ट आने से उत्तराखंड सरकार और पुलिस प्रशासन के माथे की चिंता बढ़ा दी है लक्ष्मण झूला एक तरफ से झुक गया है जिस कारण से आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है इससे पहले पूर्व में कांवड़ यात्रा के दौरान लाखो कांवड़ियों को लक्ष्मण झूला पूल से नीलकंठ जाने दिया जाता था और राम झूला पूल से आने दिया जाता था ऐसे में ही कांवड़ियों को पूल पार करवाने में तीन से चार दिन लग जाये करते थे अब यदि प्रशासन एक ही पूल से आना और जाना करती है तो यह समय अंतराल बढ़ सकता है और ऐसे में कांवड़ियों को संभाल पाना पुलिस के लिए मुश्किल हो सकता है कभी भी भगदड़ मच सकती है यदि पुलिस के द्वारा छोटी छोटी टुकड़ियों में लक्ष्मण झूला से ही कांवड़ियों को जाने दिया जाता है तो पूल कितने समय तक अपने ऊपर भार को झेल सकता है ये कहना मुश्किल है क्यों की मुंबई आई आई टी की रिपोर्ट के अनुसार जो सुझाव दिया गया है की इस पूल को तुरंत आवाजाही होते बंद कर दिया जाये वही पुलिस डी जी लॉ एंड आर्डर ने माना की इस बार कांवड़ियों के लिए खतरा बढ़ गया है और पुलिस ऐसा रास्ता चुनेगी जिस में खतरा कम हो
उत्तराखंड में इस बार कांवड़ यात्रा में 3 करोड़ लोगों के आने का अनुमान है. उत्तराखंड पुलिस बाकी राज्यों के साथ समन्वय बनाने की कोशिश में है लेकिन पश्चिमी यूपी, हरियाणा से आने वाले कांवड़ियों को काबू में रखना हमेशा चुनौती रहती है. लक्ष्मण झूला और कांवड़ियों को लेकर मुखयमंत्री कई बैठक कर चुके है मुख्य सचिव उत्पल कुमार ने बताया की सभी विभागों की बैठक में आवश्यक निर्देश दे दिए गए है


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