रिपोर्टर- सुशील कुमार झा,
जंग कोई भी हो, तभी जीती जाती है जब योद्धा मोर्चा संभालते हैं। आजकल कुछ ऐसे ही हालात हैं। देश-विदेश, शहर-गांव, अमीर-गरीब, राजा-फकीर हर कोई कोरोना वायरस की दहशत के साए में जी रहा है। इस दहशत के निदान और कोरोना वायरस के खात्मे के लिए कर्मयोद्धाओं ने मोर्चा संभाल रखा है। ये कर्मयोद्धा न हों, तो हर किसी का जीवन ठहर सा जाए। बैंक में काम कर रहे बैंककर्मी, सुरक्षा कवच बने पुलिसकर्मी, जीवन को बचाने की जद्दोजहद में जुटे स्वास्थ्यकर्मी, देश के प्रति अपना दायित्व बखूबी निभा रहे हैं। समाज ने भी कर्मयोद्धाओं की सेवा का महत्व समझा है। उन्हें सम्मान और प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे कर्मयोद्धाओं को काम करने के लिए नई ऊर्जा मिल रही है। कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए आवश्यक स्वच्छ वातावरण बनाने के लिए सफाईकर्मी हर समय सफाई करते दिखाई दे रहे हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी परवाह किए बगैर कस्बे के बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षा की कमान संभालने वाले कर्मयोद्धाओं की हर तरफ सराहना हो रही है। साहस, समर्पण और सेवा इसी जज्बे के साथ कोरोना वायरस संक्रमण के डर को नजर अंदाज कर कर्मयोद्धा अपने दायित्व के निर्वहन में जुटे हैं। यह कर्मयोद्धा ही हैं, जिनके भरोसे आम नागरिक का जीवन सरल और सहज है। स्थानीय प्रशासन ने किराना, दवा एवं दुग्ध पदार्थों की दुकानों को सीमित समय के लिए खोलने की छूट दे रखी है। इसके अलावा कई आवश्यक वस्तुएं ऐसी हैं, जिन पर आम नागरिक खासा निर्भर करता है। इनमें फल-सब्जी, गैस सिलेंडर, अखबार आदि शामिल हैं। इसके अलावा चिकित्सक, डाकिया, सफाईकर्मी, सैनिटाइजेशन टीम का भी लॉकडाउन के दौरान दायित्व निर्वाह के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान है। इन वर्गों के लोग खासा जोखिम उठाकर आमजन के काम आ रहे हैं। शहर हो या गांव कई जगहों पर कर्मयोद्धा ड्यूटी पर मुस्तैद नजर आ रहे हैं। कोरोना को काबू में करने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन के कारण घरों में कैद और जिम्मेदार लोग कर्मयोद्धाओं को सम्मान देकर उन्हें उनकी ड्यूटी का इनाम दे रहे हैं। यही वजह भी है कि कर्म योद्धाओं को सम्मान और प्रोत्साहन मिलने से इस वर्ग के लोग लगातार क्षेत्र में बने हुए हैं।

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