किसने करा दिया मुखिया से उत्तराखंड के इतिहास में बदलाव
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आखिर कौन है वो जो मुखिया की छीछालेदर कराने में अमादा है आखिर कौन है वो गुनेहगार जो आधा अधूरा ज्ञान मुखिया को देने में जुटा हुआ है ऐसी नासमझी उत्तराखंडी से तो बिलकुल नहीं होनी चाहिए अगर इस प्रदेश का इतिहास और आंदोलनों का इतिहास की जानकारी अधूरी है तो कैसे सवरेगा प्रदेश ये बड़े शर्म की बात है ऐसे में तो जिन लोगो ने पर्वतीय प्रदेश के लिए जो सपने संजोय इसके बाद तो उनका कोई महत्व ही नहीं रह जाता और जब प्रदेश का मुखिया भी प्रदेश को गंभीरता के साथ आगे ले जाने के भरसक प्रयास भी करने की बात कहता हो … खैर बात कोई भी रही हो आज लोकजन टुडे उस आधे अधूरे ज्ञान को आपके सामने लाने की कोशिश करेगा इस विषय पर आज जब वरिष्ठ पत्रकार जयसिंह रावत जी से बात हुई जो उत्तराखंड की संस्कृति और इतिहास को बखूबी जानते है ने अपने अनुभव हमारे साथ साझा किये तो ऐसा क्या गलत और अधूरा ज्ञान मुख्यमंत्री के सामने परोसा गया जानते है ….

क्या है पूरा मामला
आज जब प्रदेश के मुख्यमंत्री एक कार्यक्रम में सम्बोधन कर रहे थे तभी उनसे ऐसी बात निकली जो सामान्य ज्ञान के विपरीत थी उत्तराखंड के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र रावत आज मीडिया को संबोधित करते हुए कह रहे थे कि उत्तर प्रदेश में उत्तराखंड के लिए अलग मंत्रालय की स्थापना श्री हेमवती नंदन बहुगुणा ने की थी कि जबकि ये तर्क एकदम गलत है वरिष्ठ पत्रकार जयसिंह रावत जी इस पर व्हाट्सप्प ग्रुप में इस बावत इतिहास से अवगत करते हुए पोस्ट डाली जिस पर लोकजन टुडे ने उनसे बात की जिसमे जयसिंह रावत जी ने बताया कि पर्वतीय विकास परिषद् का गठन १९६९ में श्री चंद्रभान गुप्त ने किया था जो नैनीताल से दो बार विधायक भी रहे थे जिसके बाद पर्वतीय विकास निगम बनाया गया जिसकी जिम्मेदारी श्री परिपूर्ण नन्द पैन्यूली को दी गयी जिसके बाद ये पर्वतीय विकास निगम दो भागो में बांटा गया जिसे हम आज गढ़वाल मंडल और कुमाऊं मंडल के नाम से जानते है

दिवंगत हेमवती नंदन बहुगुणा पर्वतीय राज्य को बनने नहीं देना चाहते थे बल्कि उनका तो ये मानना था कि उत्तराखंड क्षेत्र की पर्वतीय इकाइयां जब छोटी होंगी तभी विकास संभव है बहुगुणा जी तो ये भी चाहते थे कि अगर जिले कमिशनरी होंगे तभी पहाड़ का विकास संभव है राज्य बनाने से अच्छा है कि राज्य इकाइयां छोटी हो लेकिन हमारे मुख्य मंत्री जी ने तो जो आज दावा पेश किया है वो सरासर ग़लत एवम् तथ्यों से बहुत दूर है। वास्तव में उत्तराखंड के लिए पर्वतीय विकास विभाग की स्थापना कमलापति त्रिपाठी ने की थी। इस विभाग के पहले मंत्री नरेंद्र सिंह भंडारी थे। बाद में जब कमलापति त्रिपाठी को हटा कर बहुगुणा जी को मुख्यमंत्री बनाया गया तो बहुगुणा जी ने भंडारी जी को मंत्रिमंडल में नहीं लिया था । इस विभाग में कैबिनेट स्तर के पहले मंत्री बर्फिया लाल ज्वाठा थे। अपने प्रदेश और उत्तराखंड संबधी अल्प ज्ञान से आज इस बात की चर्चा काफी आम बनी हुई ही कि जब मुखिया को ही सही नहीं पता तो यहाँ के अफसरान कैसे प्रदेश की स्थिति सवारेंगे ये एक बड़ा सवाल है
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