कौन बना बकरा और कौन बनेगा बकरा!

लोकजन टुडे।

उत्तराखंड में बीजेपी आखिरकार हार मान गयी या बली का बकरा बन गये तीरथ! निशाना पूरब से पश्चिम का हैं नाईट वॉचमन का विकेट गिराकर ओपनर बल्लेबाज़ी करने उतरी ममता दीदी को इस इस्तीफे से डरना चाहिए.. निर्वाचन आयोग अगर चाहता तो विशेष परिस्थिति का लाभ दे कर तीरथ को राजनीतिक जीवनदान दे सकता था लेकिन ऐसा नहीं हुआ.. लेकिन ये क्यास लगाना भी गलत नहीं होगा कि हार कर भी जीतने वाले को बाज़ीगर कहते हैं राजनीती की समझ रखने वाले मानते हैं कि निर्वाचन आयोग का कड़ा कदम पश्चिम बंगाल पर भारी ना पड़ जाये..ये तो रही भविष्य के गर्भ में छुपी हुई बात..आइये अब बात करते हैं कोविड से भारी इस्तीफा या इस्तीफे पर भारी कोविड.. किसी की भी कुछ समझ नहीं आ रहा हैं कि ये गुगली हुई क्यू! आइये अब बात करते हैं दूसरे पहलु की…आपको बता दें कि जहां एक और उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर मंत्री और विधायक दावा करते नहीं थक रहे थे कि तीरथ सिंह रावत के नेतृत्व में उप चुनाव लड़ा जाएगा लेकिन 2 जुलाई को यह स्पष्ट हो गया कि तीरथ सिंह रावत हार मान चुके हैं यानी कि हार मान चुकी है भाजपा उपचुनाव में हार के डर के वजह से तीरथ सिंह रावत से केंद्रीय नेतृत्व ने इस्तीफ करवा दिया गया? कितनी सच्चाई हैं इस बात में…देश की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा और हुंकार भरने वाली बीजेपी उत्तराखंड में हार मान गई कारण सबके सामने है कि उत्तराखंड में दूसरी बार मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा या बड़े परिवर्तन की और इशारा हैं.. बहराहाल अगर ऐसा होता हैं तो बड़ी सूझबूझ के साथ फ़ैसला किया गया था पूरी पट कथा बंगाल चुनाव के दौरान ही लिख ली गयी… क्या उत्तराखंड में या देश में ऐसा कोई मुद्दा नहीं था जिसको लेकर उत्तराखंड में बीजेपी द्वारा उप चुनाव लड़ा जाए, आपको बता दें कि देश में लगातार महंगाई आसमान छू रही है जिसको लेकर अब देशभर में जगह-जगह प्रदर्शन भी देखने को मिल रहा है हालांकि उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सिंह रावत को बदलने के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि तीरथ सिंह रावत के नेतृत्व में सब कुछ सही लग चलेगा लेकिन 111 वे दिन ही भाजपा ने सरेंडर कर दिया और मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से इस्तीफा करवा दिया 3 जुलाई की तारीख को होने वाले इस्तीफे को 2 जुलाई की रात ही राज्यपाल को सौंप दिया गया।


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