दरोगा को यह अधिकार किसने दिया पत्रकार को दे रहा धक्का आम जनता के साथ क्या सलूक करता होगा

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देहरादून

 

 

दशहरे के दिन हम हर वर्ष रावण को इसलिए जलाते हैं ताकि अपने अंदर के रावण रूपी शैतान को खत्म कर अच्छाइयों के मार्ग पर चलें ,

 

लेकिन उत्तराखंड  मित्र पुलिस अच्छाई पर चलने के बजाय अपना शैतानी रूप दिखा रही है जी हां हम बिल्कुल सही कह रहे हैं यह दरोगा जो एक व्यक्ति को धक्का मारते हुए दिख रहा है आखिर किस अहंकार में ऐसा व्यवहार कर रहा है क्या इस दरोगा को अपनी वर्दी का अभिमान है या फिर  पुलिसकर्मी होने के चलते यह सोचता है कि उसे आम जनता के साथ यह सब करने का अधिकार है लेकिन जिस व्यक्ति को यह पुलिसकर्मी धक्का मार रहा है वह कोई आम व्यक्ति नहीं एक उत्तराखंड के सम्मानित समाचार पत्र का वरिष्ठ पत्रकार है ,

एक बार को हम यह मान ले यह कोई आम आदमी है तो क्या पुलिस कर्मियों को यह अधिकार है क्या    जो हमारे संविधान के द्वारा हमें दिए गए हैं  फिलहाल किसी व्यक्ति के द्वारा उस वक्त यह वीडियो बना लिया गया  इसके बाद वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस कप्तान के द्वारा खाना पूर्ति करते हुए दरोगा को लाइन हाजिर कर दिया गया है,

 

इस घटना के बाद तमाम मीडिया संगठन मैं नाराजगी देखी जा रही है मीडिया कर्मी दरोगा के खिलाफ निलंबन की मांग कर रहे हैं

 

मीडिया कर्मियों के द्वारा डीजीपी से इस मामले की शिकायत की गई उनके द्वारा जब वीडियो देखा गया तो वह स्वयं वीडियो देख हैरान हो गए

फिलहाल कप्तान के द्वारा क्षेत्राधिकार को इस मामले की जांच दी गई है जांच पूरी होने के पश्चात उम्मीद की जा रही है शायद कोई कार्रवाई हो पाए

 


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