रिपोर्ट: फरमान खान
लक्सर: लक्सर तहसील क्षेत्र के सुलतानपुर आदमपुर निवासी एडवोकेट जावेद अली पुत्र मजहर अली ने तहसीलदार लक्सर को दिए गए शिकायती पत्र में बताया कि वह भी किसान हैं तथा गन्ना समिति के माध्यम से अपना गन्ना शुगर मिल लक्सर को भेजता है। तथा उसे क्षेत्रफल के हिसाब से गन्ना पर्ची जारी कर गन्ना क्रय किया जाता है।
वही शिकायतकर्ता ने सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अपने ही गांव के किसान अकलीम, मुर्सलीन, नफीस, कलीम अहमद, नसीम अहमद शमीम अहमद, पुत्रगण बशीर अहमद व नसरीन पत्नी कलीम अहमद इसराना पत्नी नसीम अहमद शरीर पत्नी शमीम अहमद नाजिया पत्नि अकलीम अहमद रेशमा पत्नी मुर्सलीन अहमद समस्त निवासीगण सुलतानपुर आदमपुर कोतवाली लक्सर के कृषि भूमि की गन्ने की उपज के क्षेत्रफल की सूचना मांगी थी। जिसमें बड़ी हेराफेरी और किसान की जालसाजी सामने आई है।
सूचना के अधिकार में जो विवरण प्राप्त हुए वह बड़े ही चौंकाने वाले हैं। महज 29 बीघा जमीन के किसानो ने लगभग 600 बीघा जमीन में गन्ना खड़ा दर्शाकर कैसे गन्ना पर्ची हासिल की सूत्रों की मानें तो इस में गन्ना विभाग के सुपरवाइजर की भी बड़ी भूमिका नजर आ रही है। कूटरचना कर बना कर दी गई गन्ना विभाग को खतौनियो का विवरण गन्ना पेराई सत्र 2019-20 2020-21 में कृषक कोड संख्या 22049 के कृषक अकलीम के नाम 4.760 हेक्टेयर (लगभग 70 बीघा खाम) व कृषक कोड संख्या 22050 के कृषक मुर्सलीन के नाम 4.760 हेक्टेयर (लगभग 70 बीघा खाम) कृषक कोड संख्या 22051 के कृषक मुस्तकीम के नाम 4.760 हेक्टेयर ( लगभग 70 बीघा खाम) कृषक कोड संख्या 22057 के कृषक कलीम अहमद के नाम 4.760 हेक्टेयर( लगभग 70 बीघा खाम) कृषक कोड संख्या 22058 के कृषक नसीम अहमद के नाम 4.760 हेक्टेयर (लगभग 70 बीघा खाम)कृषक कोड संख्या 22060 के कृषक शमीम अहमद के नाम 4.760 हेक्टेयर (लगभग 70 बीघा खाम) कृषक कोड संख्या 71411 के कृषक श्रीमती नसरीन पत्नी कलीम अहमद के नाम 1.523 हेक्टेयर (लगभग 22 बीघा खाम) व कृषक कोड संख्या 71412 के कृषक श्रीमती इसराना पत्नी नसीम अहमद के नाम 1.652 हेक्टेयर (लगभग 24 बीघा खाम) कृषक कोड संख्या 71413 के कृषक श्रीमती शहरीन पत्नी शमीम अहमद के नाम 1.566 हेक्टेयर ( लगभग 22 बीघा खाम) कृषक कोड संख्या 71414 के कृषक श्रीमती नाजिया पत्नि अकलीम अहमद के नाम 1.641 हेक्टेयर (लगभग 24 बीघा खाम) कृषक कोड संख्या 71415 के कृषक श्रीमती रेशमा पत्नी मुर्सलीन के नाम 1.463 हेक्टेयर (लगभग 21 बीघा खाम)कृषि भूमि अंकित है।
वही शिकायतकर्ता ने बताया कि उसके द्वारा मांगी गई एक अन्य सूचना गन्ना आयुक्त हरिद्वार द्वारा दी गई सूचना से सनसनीखेज खुलासा हुआ कि कृषक अकलीम इसका कोड संख्या 22049 है की असल जमीन का क्षेत्रफल 0.282 हेक्टेयर है तथा कृषक मुर्सलीन का कोड संख्या 22050 जिसका क्षेत्रफल 0.282 हेक्टेयर है कृषक मुस्तकीम कोड संख्या 22051 जिसका क्षेत्रफल 0.282 हेक्टेयर है कृषक नफीस जिसका कोड संख्या 22052 जिसका क्षेत्रफल 0.282 हेक्टेयर है कृषक कलीम अहमद कोड संख्या 22057 जिसका क्षेत्रफल 0.384 हेक्टेयर है कृषक नसीम अहमद कोड संख्या 22058 जिसका क्षेत्रफल 0.282 हेक्टेयर है कृषक शमीम अहमद कोड संख्या 22060 जिसका क्षेत्रफल 0.282 हेक्टेयर है। यानी कुल 7 कृषको के नाम लगभग 29 बीघा गन्ने का सट्टा दर्शाया गया है वही गन्ना आयुक्त हरिद्वार ने सूचना में बताया कि महिलाओं के खाते बंद है। जिन पर कोई गन्ना इत्यादि दर्ज नहीं है सूचना के अधिकार के द्वारा मिली जानकारी से पता चला की महिलाओं को मौजा पचेवली के खसरा नंबर 204,43, 74,164,67, की खतौनी में फर्जीवाड़ा कर गन्ना समिति में उक्त खतौनी लगाकर इन सभी नामित कृषको ने फर्जी खतौनियों के आधार पर गन्ना समिति व क्षेत्र के समस्त किसानों को गुमराह करके पेराई सत्र में अपना निजी लाखों रुपए का मुनाफा कमाया है।जबकि मौजा पचेवली के खसरा नंबर 204 के असल भूस्वामी मनफूल सत्यपाल शेर सिंह राम रतन पुत्र गंगाराम व श्रवण कुमार समय सिंह ब्रह्मपाल पुत्रगण रामपाल निवासी पचेवली है।तथा खसरा नंबर 43 में असल स्वामिनी नसीमा पत्नी हमीद निवासी दरगाहपुर हैं व खसरा नंबर 74 के असल भूस्वामी इसरार महबूब अशरफ इशरत मुशर्रफ पुत्रगण अली हसन व महमूदन पत्नी अली हसन निवासी सुलतानपुर आदमपुर हैं।
तथा खसरा नंबर 164 के असल भूस्वामी नाथीराम ऋषि पाल नैन सिंह पुत्रगण अतरू निवासी इस्माइलपुर व खसरा नंबर 67 के असल भूस्वामी रामचंद्र व रेखा देवी पत्नी धर्म सिंह निवासी पचेवली है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस प्रकार उक्त खसरा नम्बरान में नामित कृषको ने खुद व अपनी पत्नियों के नाम असल भू स्वामियों की खतौनी में कूट रचना कर गन्ना समिति को गुमराह कर अपना व अपने परिवार का फर्जी तरीके से नाम इंद्राज कर रकबा बढ़ा चढ़ाकर आर्थिक नुकसान पहुंचाया है।शिकायतकर्ता ने तहसीलदार लक्सर को पूरे मामले से अवगत कराते हुऐ।जांच कर कानूनी कार्यवाही करने हेतु प्रार्थनापत्र दिया है।अब देखना ये है कि दोषियों के खिलाफ राजस्व विभाग कब कार्यवाही करता है।
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