लोकजनटुडे ब्यूरो
हरिद्वार से बड़ी खबर सामने आ रही है जहां शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राज्य सरकार के फैसले पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। राजभवन का नाम बदलकर “लोक भवन” किए जाने पर उन्होंने व्यंग्य किया कि जब नाम “लोक भवन” है, तो जनता के आने-जाने पर रोक क्यों है? साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री आवास का नाम “तीर्थ” रखने पर भी आपत्ति जताई है। शीतकालीन सत्र की यात्रा की शुरुआत से पहले शंकराचार्य मुक्तेश्वर स्थित आनंद नमामि गंगे घाट पहुंचे। यहां उन्होंने गंगा पूजन कर संकल्प लिया और फिर धर्म और शासन से जुड़े कुछ तीखे सवाल उठाए। राज्य सरकार ने हाल ही में राजभवन का नाम बदलकर “लोक भवन” रखने का निर्णय लिया था। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा — अगर “राज” शब्द से आपत्ति है और भवन को “लोक भवन” कहा जा रहा है, तो फिर यह सचमुच जनता के लिए खुला होना चाहिए। इसी के साथ शंकराचार्य ने प्रधानमंत्री आवास का नाम “तीर्थ” रखने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि “तीर्थ” शब्द का प्रयोग धार्मिक स्थलों के लिए होता है, किसी शासन या राजनीतिक भवन के लिए नहीं। उनके मुताबिक, ऐसे शब्दों का सम्मान अपनी जगह होना चाहिए। शंकराचार्य के इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। हालांकि सरकार की ओर से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। धर्म और शासन के इस नए विवाद ने एक बार फिर नामकरण की राजनीति को सुर्खियों में ला दिया है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या जवाब देती है।
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