पीएम मोदी के सपनों को लूट कर भागने वाला “महा-वॉटर स्कैम” का ‘मिस्टर इंडिया’ ऑफिसर उत्तराखंड में किस अधिकारी का रिश्तेदार !

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लोकजन टुडे, ब्यूरो

राजस्थान में मचे इस सियासी और प्रशासनिक घमासान ने अब ‘क्राइम थ्रिलर’ फिल्म जैसा मोड़ ले लिया है।

क्या उत्तराखंड के पहाड़ो में छिपा है पीएम मोदी के सपनों को लूट कर भागने वाला!

महा-वॉटर स्कैम’ का मिस्टर इंडिया ऑफिसर उत्तराखंड में किस अधिकारी का रिश्तेदार चर्चाओ का बाज़ार गर्म!

अगर ऐसा हुआ तो धामी सरकार पर लगेगा बड़ा सवालिया निशान!

*₹900 करोड़ के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले की जांच कर रही ACB ने जाल बिछाया तो है, लेकिन मुख्य खिलाड़ी अभी भी गिरफ्त से बाहर हैं।

*पूरी खबर का एक सनसनीखेज और विस्तृत विश्लेषण:
*राजस्थान* का ‘महा-वॉटर स्कैम’: 40 टीमें, 100 ठिकाने और एक ‘मिस्टर इंडिया’ ऑफिसर
राजस्थान के घर-घर में नल से जल पहुँचाने का सपना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। आरोप है कि रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल और उनके करीबियों ने मिलकर सरकारी खजाने में ऐसी ‘सेंध’ लगाई कि पानी की जगह करोड़ों की काली कमाई बहने लगी। फर्जी कंप्लीशन सर्टिफिकेट्स और मिलीभगत के दम पर टेंडर हथियाए गए और ₹900 करोड़ का वारा-न्यारा कर दिया गया।


आपरेशन ‘पकड़ो और बेनकाब करो’
ACB ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। आलम यह है कि:
40 टीमें पिछले 16 दिनों से दिन-रात एक किए हुए हैं।
100 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की गई है, जिसमें जयपुर से लेकर दिल्ली और मुंबई तक का इलाका शामिल है।
21 शहरों में दबिश दी जा रही है।
50 लोग रडार पर हैं, जिनमें अग्रवाल के रिश्तेदार गौरव, सौरभ, समीर और व्यवसायी प्रणव चंद्रा से पूछताछ जारी है।

उत्तराखंड का कनेक्शन’: क्या पहाड़ों में मिली है पनाह?
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ अब देवभूमि उत्तराखंड की ओर इशारा कर रहा है। सूत्रों और गलियारों में चर्चा तेज है कि फरार आरोपी और उनके परिवार के सदस्य उत्तराखंड के किसी जनपद में सुरक्षित ठिकाना बनाए हुए हैं।


अंदर की खबर:

विश्वसनीय सूत्रों से यह जानकारी छन कर आ रही है कि इन आरोपियों को उत्तराखंड में एक सीनियर रैंक के पुलिस ऑफिसर का वरदहस्त प्राप्त है। यह अधिकारी वर्तमान में एक बेहद वरिष्ठ और प्रभावशाली पद पर तैनात हैं।


चर्चा का बाज़ार बेहद गर्म है बड़े अधिकारियों में हड़कंप की स्थिती बनी हुई है आख़िर कौन है वो अधिकारी इसकी भी भनक शुरू हो गई है।


चर्चा यह भी है कि ये पुलिस अधिकारी इन आरोपियों के अत्यंत घनिष्ठ और नजदीकी रिश्तेदार हैं, इसी अधिकारी के संरक्षण के चलते ही नेपाल के रास्ते की कहानी पूरी लिखी गई है और अपने रिश्तेदार को सेफ हाउस में जगह दी गई है जिसके चलते कानून के हाथ वहां तक पहुँचने में हिचकिचा रहे हैं।

क्या होगा अगला कदम?
रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी हो चुका है। जितेंद्र शर्मा, मुकेश गोयल और संजीव गुप्ता जैसे नामी आरोपी भी ‘फरार’ की लिस्ट में हैं। अगर ये कानून के शिकंजे में आते हैं, तो इन्हें Prevention of Corruption Act के तहत लंबी जेल और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।
यह मामला सिर्फ पैसों की हेराफेरी का नहीं है, बल्कि उस सिस्टम की पोल खोलता है जहां जनता की प्यास बुझाने के लिए आए पैसों से अफसरों की तिजोरियां भरी गईं।


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