क्या सीएम से बड़े होते है डीएम?

Share your love


आदिल पाशा देहरादून। क्या सीएम से बड़े होते है डीएम ये हैडलाइन पढ़कर आपके मन में ज़रूर ये ये जवाब होगा कि नहीं सीएम ही सबसे बड़े होते है लेकिन जनता का आरोप है कि ये साहब किसी का भी फोन नहीं उठाते चाहे वो कोई भी हो और ये आरोप पर मोहर तब लग जाती है जब वीवीआईपी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने इसपर सार्वजानिक नाराज़गी ज़ाहिर की प्रोटोकॉल तो छोड़ ही दीजिए कई बार उनके द्वारा डीएम को फोन भी किए गए तब भी नहीं उठाए। इन बातों से ये अहसास होता है कि डीएम सविन बंसल अपने आपको कुछ कम नहीं समझते लेकिन इस बार मामला दिल्ली तक पहुंच गया।

आपको बता दे कि पिछले महीने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला देहरादून पहुंचे जहां उनके प्रोटोकॉल के उल्लंघन का मामला सामने आया है आपको बता दे कि देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने लोकसभा अध्यक्ष की फोन कॉल रिसीव नहीं की इसके साथ ही पलटकर संपर्क न करने पर देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल से अब शासन ने जवाब तलब किया है और ये जवाब तलब जब हुआ है जब उत्तराखंड शासन को भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग से नोटिस आया है जिसमें उन्होंने देहरादून डीएम द्वारा लोकसभा अध्यक्ष के प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने की बात कहीं है।

केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग से उत्तराखंड शासन को आया नोटिस

इस पूरे प्रकरण में दिल्ली से उत्तराखंड शासन को सख्त लहजे में पत्र भेजा गया है, जिसमें दो टूक कहा गया है कि लोकसभा अध्यक्ष के दौरे के दौरान डीएम देहरादून ने प्रोटोकॉल के मानकों का उल्लंघन किया गया इस दौरान ना केवल डीएम देहरादून सविन बंसल ने लोकसभा अध्यक्ष को रिसीव करने की औपचारिकता निभाई, सम्मानजनक तरीके से उनसे कोई बात साझा नहीं कीं।

लोकसभा अध्यक्ष के स्टाफ ने 7 बार किया फोन, नहीं की डीएम ने बात

आपको ये भी बता दे कि लोकसभा अध्यक्ष के स्टाफ ने 10 और 11 जून को डीएम सविन बंसल को मोबाइल और लैंडलाइन पर कुल 7 बार संपर्क करने की कोशिश की लेकिन हर बार यह कहकर टाल दिया गया कि डीएम मीटिंग में व्यस्त हैं बाद में जब इस विषय को मुख्यमंत्री कार्यालय को अवगत कराया गया तब जाकर महोदय ने कॉल बैक किया।

व्यवहार भी नहीं रहा सौम्य

सूत्रों के अनुसार, डीएम ने जब लोकसभा अध्यक्ष से फोन पर बात की तो उनका व्यवहार फोन पर भी संतोषजनक नहीं था और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को 12 जून को रिसीव करने एयरपोर्ट तक भी नहीं पहुंचे, जिससे पूरे प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ है और इसी को लेकर केंद्र ने संज्ञान लेकर राज्य सरकार से इस पूरे प्रकरण में हुए लोकसभा अध्यक्ष के प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर जवाब मांगा है।

उत्तराखंड शासन ने गंभीरता से लिया संज्ञान

लोकसभा अध्यक्ष के प्रोटोकॉल के उल्लंघन के मामले को गंभीरता से लेते हुए सचिव विनोद कुमार सुमन ने डीएम देहरादून से तत्काल जवाब तलब किया और पूरे प्रकरण की जानकारी ली।इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि इस प्रकरण का निस्तारण हो गया है लेकिन एक जिले के जिलाधिकारी का इस प्रकार का रवैया क्या उत्तराखंड की केंद्र ने किरकिरी नहीं करा रहा है आख़िर इस व्यवहार के अधिकारी को क्यों इतनी बड़ी जिम्मेदारी दे दी जाती है।

पत्रकारों का भी जिलाधिकारी देहरादून नहीं उठाते फोन, घंटों बाद लैंडलाइन से स्टाफ करता है फोन

आपको बता दे ज़िला देहरादून के पहले ये माननीय जिलाधिकारी है जो किसी पत्रकार का फ़ोन भी उठाना गवारा नहीं समझते जब भी किसी प्रकरण में किसी भी पत्रकार साथी को जिलाधिकारी से कोई जानकारी लेनी होती है तो कभी किसी की कॉल रिसीव नहीं होती और फिर घंटों बाद लैंडलाइन से स्टाफ के द्वारा कॉल की जाती है कि आप साहब को कॉल कर रहे थे बताइए क्या काम है अब जब माननीय जिलाधिकारी सविन बंसल लोकसभा अध्यक्ष का फोन नहीं उठाते तो फ़िर उनके लिए पत्रकार क्या है वो सब समझ सकते है।

लोकजन टुडे ने उनसे इस संबंध में बात करनी चाही लेकिन उनका कॉल रिसीव नहीं हो पाया इस प्रकरण में जब डीएम देहरादून अपना पक्ष रखेंगे तब लोकजन टुडे उन्हें प्रमुखता से प्रकाशित और प्रसारित करेगा।


Discover more from Lokjan Today

Subscribe to get the latest posts sent to your email.