देहरादून

सुना है उत्तराखंड वन विकास निगम मुख्यालय डालनवाला में मंत्री की बैठक से अध्यक्ष नदारद रहे
अध्यक्ष को निगम की बैठक लेना मंत्री के द्वारा रास नहीं आया और वह बैठक में नहीं पहुंचे कल 28 अप्रैल को वन मंत्री सुबोध उनियाल के द्वारा डालनवाला स्थित वन विकास निगम कार्यालय में समीक्षा बैठक ली इस बैठक में अध्यक्ष वन विकास निगम नहीं पहुंचे
चर्चा हो रही है कि वन विकास निगम के अध्यक्ष कैलाश गहतोड़ी को बैठक में आधिकारिक रूप से नहीं बुलाया गया इस कारण चर्चाओं ने जोर पकड़ा है कि गहतोड़ी को भी कैबिनेट मंत्री स्तर का दर्जा मिला है मंत्री की तरह ही वन निगम को स्वायत्त रूप से चलाने की छूट है जिसमें सरकार का ज्यादा दखल नहीं होता पिछली सरकारों में भी वन मंत्रियों और वन निगम अध्यक्षों के बीच इसी को लेकर अक्सर तकरार रहती थी अब वन निगम में हुई इस बैठक में अध्यक्ष के शामिल नहीं होने से इस मामले को भी इसी रूप में देखा जा रहा है चर्चा है कि वन निगम में गवर्निंग बॉडी की सबसे बड़ी बैठक अध्यक्ष की अध्यक्षता में होती है स्वायत्त संस्था के रूप में वन निगम में तमाम बड़े प्रस्तावों पर अध्यक्ष की सहमति जरूरी है जबकि शुक्रवार को मंत्री ने भर्ती रॉयल्टी सहित तमाम बड़े विषयों पर निर्देश दिए अध्यक्ष की सहमति के बिना अफसरों के लिए इन निर्देशों को पालन करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है इस मामले में वन निगम अध्यक्ष से संपर्क करने की कोशिश की गई पर उनसे संपर्क नहीं हो पाया

क्या होता है स्वायत्त संस्था
सहकारी समितियां की तरह ही वन निगम भी एक स्वायत्त संस्था है वह अपनी कमाई से ही वेतन और अन्य खर्चे निकालता है वन निगम सरकार से कोई बजट नहीं लेता बल्कि सरकार को हर साल करोड़ों का राजस्व देता है ऐसे में इसे स्वायत्त संस्था के रूप में चलाने के लिए अध्यक्ष की नियुक्ति की जाती है
हालांकि बताया जा रहा है कि वन्य विकास निगम के अध्यक्ष कैलाश गहतोड़ी शहर से बाहर होने के कारण बैठक में नहीं पहुंच पाए बाकी सच क्या है यह मंत्री और अध्यक्ष अच्छी तरह अवश्य जानते होंगे
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