नैनीताल जिले की नदियां भले ही कागजो में खुल गयी हो, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और…!

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रामनगर: प्रदेश सरकार की आर्थिक रीढ़ कहे जाने वाले खनन कार्य को भले ही सरकार ने 2 नवंबर को चुगान के लिए सुचारू कर दिया हो पर धरातलीय स्थिति कुछ और ही है।

मानसून सत्र के बाद से ही अक्टूबर माह से प्रदेश सरकार नदियों में चुगान के कार्य को प्राथमिकता देकर हर वर्ष खनन कराती है, जिससे प्रदेश में राजस्व से आर्थिक आय मजबूत हो सके। लेकिन इस बार प्रदेश सरकार के नुमाइंदे सरकार का लक्ष्य पूरा करा पाएंगे ऐसा साफ नजर आता नही दिख रहा।

जी हां आपको बता दे कि प्रदेश की नैनीताल जिले की नदियां भले ही कागजो में खुल गयी हो लेकिन धरातल पर स्थिती इसके विपरीत है। रामनगर की दाबका नदी को वन विकास निगम ने 2 नवंबर को खननं कार्य के लिए खोल दिया था जिसमे अभी तक पंजीकृत वाहन 117 हो गए है और मात्र 54 वाहन ही खननं कार्य कर रहे है। प्रशासन के दावे फेल होते नजर आ रहे है। खननं कार्य प्रारंभ होने से पहले स्थानीय खननं समिति ने खननं कारोबारियों के साथ एक बैठक की थी जिसमे समिति ने ये फरमान सुनाया था कि प्रत्येक गेट पर 2 तौल कांटे लगाए जाएंगे और किसी भी वाहन स्वामी को दिक्कत नही होगी लेकिन आज भी दाबका नदी में 1 ही कांटा कार्य कर रहा है वो भी कभी 2 घण्टे तो कभी 3 घण्टे सही से चल पा रहा है। जिससे कारोबारियों को तो दिक्कत का सामना करना ही पड़ रहा है।

साथ ही प्रदेश सरकार को रोजाना लाखो रुपये के राजस्व की भी हानि हो रही है। अवैध खनन के नाम पर लाखों की लूट खसौट करने वाले अधिकारी वैध खननं कराने में बौने साबित होते नजर आ रहे है। इस वीडियो में आप साफ तौर पर देख सकते है कि सरकारी नुमाइंदों को प्रदेश सरकार के राजस्व की कितनी चिन्ता नजर आ रही है 25 दिन गेट खुले हुए होने के बाद भी गेट सुचारू रूप से नही चल पा रहा है।


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