देहरादून
नशा मुक्ति नहीं टॉर्चर सेंटर बनते जा रहे दर्जनों नशा मुक्ति केंद्र

नशा छुड़ाने के नाम पर राजधानी देहरादून में दर्जनों नशा मुक्ति केंद्र यातना गृह बनते जा रहे हैं
बीते 2 सालों में कई ऐसी घटनाएं हो चुकी है जो इन केंद्रों में होने वाले बर्बरता की कहानी बयां कर रही है कई मामले तो संदिग्ध हालात में मौत के भी सामने आ चुके हैं अब ताजा मामला युवक की यातना देकर हत्या का आया तो फिर से इन केंद्रों पर सवाल खड़े हो गए हैं पिछले साल अक्टूबर में अधिवक्ता शिव वर्मा ने सीएमओ कार्यालय में एक आरटीआई दाखिल की थी इसमें नशामुक्ति केंद्रों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी गई थी इसमें पता चला देहरादून जिले में 40 नशा मुक्ति केंद्र पंजीकृत है लेकिन इनमें से ज्यादातर के पास स्टाफ की कमी है एक कमरे में कितने लोग रखे जा सकते हैं इसके बारे में कोई ठोस नियम नहीं है पता चला था कि कई नशा केंद्रों में एक कमरे में 7 से 10 लोगों को ठूंस कर रखा जाता है यहां इन्हें ना तो कोई दवाई दी जाती है और ना ही किसी डॉक्टर से समय पर परामर्श
नशा छुड़ाने का एक ही साधन इन लोगों के पास रहता है वह है पिटाई अगस्त 2021 में क्लेमेंट टाउन स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र में जब युक्तियां भागी तो उन्होंने तमाम तरह के खुलासे किये बताया कि युवक-युवतियों को नुकीली ईंट पर बैठाया जाता है वहां का संचालक नशा देने का लालच देकर उनके साथ अश्लील हरकतें करता है उस वक्त प्रशासन ने इस नशा मुक्ति केंद्र को बंद करा दिया था उसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने तमाम नशा मुक्ति केंद्रों में जांच के निर्देश दिए थे जांच और निरीक्षण में भी तमाम तरह की खामियां पाई गई बावजूद इसके इनकी मनमानी पर कोई रोक नहीं लग सकी है बीते कई सालों से इनके लिए अलग से मजबूत नियम कायदे बनाने की बात चल रही है लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया

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