“मुहिम” पार्ट 2:- पेपर मिल नहीं बीमारी की मिल!

मुकेश कुमार/ राजीव चावला/ लोकजन टुडे।

लालकुआ सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल के प्रदूषण से परेशान क्षेत्रवासियों ने अब इसके खिलाफ व्यापक स्तर पर आंदोलन छेड़ने का मन बना लिया है।


बताते चलें कि 80 के दशक में लालकुआं में स्थापित एशिया की सबसे बड़ी इस पेपर मिल से क्षेत्रवासियों में आस जगी थी कि उक्त मिल के लगने के बाद यहाँ रोज़गार और व्यापार की समस्या काफी हद तक हल होगी लेकिन इसके उलट लालकुआं के लिए जहरीले प्रदूषण का पर्याय बन चुकी इस पेपर मिल से लोगों को गंभीर बिमारी और हताशा ही हाथ लगी है ऐसा यहा के स्थानीय लोगों का कहना है लोग तो यहाँ तक कहते हैं कि सेन्चुरी पेपर मिल की वजह से यहां लोगो की जिन्दगी जहरीली हो गयी है प्रदूषण के मामले में कार्र्वाई करने के लिए जिम्मेदार प्रर्यावरण विभाग के अधिकारियों से शिकायत करने का मतलब नक्कारखाने में तूती की आवाज़ बनकर रह गया है तथा चौबीस घंटे मिल से निकलने वाल धुंआ और कोयले की राख ने न जाने कितने लोगो को बीमारी की कगार पर खडा कर दिया है तथा कई लोग तो स्वर्ग सिधार गए कई तो बीमारी से जूझ रहे हैं वही मिल के प्रदूषण खिलाफ अब लोगों ने आर पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है वही मिल से प्रभावित इलाकों में लालकुआं,बिन्दुखत्ता, हल्दूचौड़ और शांतिपुरी के लोग शासन प्रशासन से गुहार लगा कर थक चुके हैं लेकिन लोगों के स्वास्थ्य को लेकर कोई गंभीर नहीं दिखाई देता स्थानीय लोगों में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को लेकर भी भारी आक्रोश है जनप्रतिनिधियों की चुप्पी को लेकर जनता में आश्चर्य है वही देश के सुप्रसिद्ध बिड़ला घराने की इतनी बडी मिल में प्रदूषण कम करने के लिये कोई भी पुख्ता इंतजाम नही किये गये है जिससे मिल का जहरीला प्रदूषण हवाओं में जहर घोल रहा है वही मिल के जहरीले प्रदूषण को लेकर अब लोगों ने आर पार कि लड़ाई का मन बना लिया है।
इधर तराई भाबर बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष रमेश पलडिंया ने कहा कि उन्होंने मिल के जहरीले प्रदूषण पर कारवाई कि मांग को लेकर ज्ञापन मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री को भेजा है तथा 15 दिनों के अंदर कारवाई नही कि गई तो वे इसके खिलाफ उग्र आंदोलन करेंगे।


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