आखिर क्यों बदले गए एक साथ पौड़ी जनपद के जिलाधिकारी और कप्तान क्या है इनसाइड स्टोरी. ?

Share your love

 

 

इस वर्ष यह दूसरा मौका है जब देहरादून के बाद एक साथ किसी जिले के डीएम और कप्तान बदले गए हो

 

उत्तराखंड का पौड़ी जनपद बहुत ही खास और अहम माना जाता है एक साथ इस जनपद के जिलाधिकारी और कप्तान का तबादला अपने आप में कई सवाल खड़े करता है और वह भी तब जब डीएम और कप्तान को तबादला होने के पश्चात भी बाध्य प्रतीक्षा में रखा गया हो

क्या है इनसाइड स्टोरी

हमारे विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार एक साथ जिले के कप्तान और जिलाधिकारी के तबादले को लेकर कई बड़े कारण है

 

जिस वजह से एक साथ जिले के जिलाधिकारी और कप्तान की छुट्टी हो गई

जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान जिले को सही ढंग से चला नहीं पा रहे थे इसका बड़ा कारण अनुभव की कमी भी कहा जा सकता है

हालांकि उससे पहले जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान अन्य जिलों मैं भी तैनात रहे लेकिन उसके बावजूद भी पौड़ी जनपद में फेल साबित हुए हालांकि जिलाधिकारी काफी मेहनत के बावजूद भी अकेले पड़ते नजर आ रहे थे जितनी मेहनत जिलाधिकारी पौड़ी विजय जोगदंडे करते थे उसके विपरीत पुलिस कप्तान उतने ही सुस्त दिखाई दिए थे जिसका खामियाजा दोनों को ही भुगतना पड़ा

 

अंकिता हत्याकांड में प्रदर्शनकारियों द्वारा नेशनल हाईवे जाम भी एक बड़ा कारण है अंकिता हत्याकांड के बाद शव को मोर्चरी में रखने के पश्चात अगले दिन जब अंतिम संस्कार होना था ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के द्वारा पूरा नेशनल हाईवे 8 घंटे से अधिक जाम कर लिया गया था इस मामले में सरकार कि खूब फजीहत हुई थी

पुलिस प्रशासन लोकल इंटेलिजेंस घटना  को समझ नहीं पाया था इसे पूरी तरह से लोकल इंटेलिजेंस का विफलता भी कहा जा सकता है ।

प्रदर्शनकारियों द्वारा सुबह से लेकर शाम तक बद्रीनाथ नेशनल हाईवे जाम कर लिया गया था एसएसपी और डीएम के समझाने के बावजूद भी प्रदर्शनकारी मानने को तैयार नहीं थे तब मुख्यमंत्री कार्यालय के द्वारा पूरे मामले को एसपी चमोली श्वेता चौबे को सौंपा गया  जिसके फलस्वरूप मुख्यमंत्री से वार्ता  कराने के पश्चात बड़ी ही कुशलता पूर्वक एसपी चमोली श्वेता चौबे के द्वारा मात्र 1 घंटे में पूरे मामले को  संभाला गया था।

जिलाधिकारी पौड़ी विजय जोगदंडे के द्वारा वंतरा रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाने को लेकर सरकार के विपरीत बयान देना भी एक बड़ा कारण है।

अभी कुछ दिनों पूर्व ही हरिद्वार लाल ढंग से आ रही बारात की बस पौड़ी में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी बस एक्सीडेंट के मुआवजे में मृतकों के नाम से ही मुआवजा वितरण को लेकर प्रशासन की खूब किरकिरी हुई थी मुआवजा राशि के चेक मृतकों के नाम से परिजनों को बांट दिए गए थे समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित होने के बाद पौड़ी प्रशासन के द्वारा हालांकि फिर चेक वापस ले लिए गए थे इस मामले में भी  सरकार को फजीहत झेलनी पड़ी

 

कुछ दिनों पूर्व स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत के गृह जनपद में पुलिस कर्मियों के द्वारा वाहन चालक की पिटाई का मामला भी इससे जोड़कर देखा जा रहा है इस मामले में पैठाणी पुलिस थाने की खूब फजीहत हुई थी यहां तक कि इस मामले में डीजीपी अशोक कुमार द्वारा जांच भी करवाई गई थी इस प्रकरण में उच्च अधिकारियों द्वारा पुलिस को खूब फटकार भी लगाई थी हालांकि पौड़ी पुलिस के द्वारा इस मामले को दबा दिया गया था और वाहन चालक पर जुर्माना भी वसूल कर लिया गया था।

कुल मिलाकर ऐसे कई और भी कारण है जिसको लेकर यह कार्रवाई की गई है अब देखना होगा यह दोनों अधिकारी कब तक  प्रतीक्षा में रखे जाते हैं।

 


Discover more from Lokjan Today

Subscribe to get the latest posts sent to your email.