राजस्थान JJM घोटाले में “फरार IAS” दबोचा गया !

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लोकजन टुडे, ब्यूरो

दिल्ली से ‘धर दबोचा’ सुबोध अग्रवाल, अब ACB मुख्यालय में गहन पूछताछ – कुमाऊँ से लेकर बड़े पुलिस अधिकारियों तक तार ?

दिल्ली। राजस्थान के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में लंबे समय से ‘फरार’ चल रहे रिटायर्ड IAS अधिकारी डॉ. सुबोध अग्रवाल (1988 बैच) की मुश्किलें अब बढ़ती नजर आ रही है साथ हीजांच टीम इस बात की भी जांच कर रही है कि आखिरकार इतने दिनों तक गायब रहने के पीछे किन अधिकारियों का खास सहयोग रहा है। सूत्र बताते हैं कि इसमें उत्तराखंड का भी नाम आ सकता है। राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने उन्हें दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। सुबह करीब 11:30 बजे हिरासत में लिए गए अग्रवाल को अब जयपुर ACB मुख्यालय लाया जा रहा है, जहां उनसे गहन पूछताछ शुरू हो गई है। कल उन्हें कोर्ट में पेश कर रिमांड मांगी जाएगी।

घोटाले की ‘पाइपलाइन’ कितनी गहरी ?

इस मामले में 900 से 979 करोड़ रुपये (कुछ रिपोर्ट्स में 960 करोड़) के टेंडरों में भारी गड़बड़ी का आरोप है। फर्जी completion certificates, over-invoicing और कमीशन के जरिए दो फर्मों (श्री गणपति ट्यूबवेल और श्री श्याम ट्यूबवेल) को टेंडर दिलाए गए। आरोप है कि इन टेंडरों में 30-40% तक महंगा बिल पास कराया गया। कुछ सूत्र तो कुल JJM प्रोजेक्ट्स को लेकर हजारों करोड़ (यहां तक कि 20,000 करोड़) के घोटाले का जिक्र कर रहे हैं।

सुबोध अग्रवाल उस समय Public Health and Engineering Department (PHED) के अतिरिक्त मुख्य सचिव थे। उनके कार्यकाल में ही फाइनेंस कमिटी के चेयरमैन के रूप में इन टेंडरों की प्रक्रिया हुई। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के बावजूद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और वर्क ऑर्डर जारी करने में मिलीभगत या लापरवाही बरती गई।

फरारी का सफर: दिल्ली से कुमाऊँ तक ?

फरवरी 2026 से फरार थे (फोन 16 फरवरी को आखिरी बार एक्टिव)।ACB ने लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया, नॉन-बेलेबल गिरफ्तारी वारंट निकाला।

21 शहरों (जयपुर, दिल्ली, नोएडा, हरियाणा, बिहार, झारखंड आदि) में 100+ ठिकानों पर छापेमारी हुई। अब सूत्र बता रहे हैं कि फरारी के दौरान सुबोध अग्रवाल उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में भी रुके थे। यह जानकारी जांच को नया मोड़ दे सकती है।

नया ट्विस्ट: बड़े पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी जांच?

सूत्रों का दावा है कि फरारी में मदद करने वाले नेटवर्क की जांच अब बड़े पुलिस अधिकारियों तक पहुंच गई है। ACB की टीम इस पहलू पर भी गौर कर रही है कि कौन-कौन सी मदद से वे इतने दिनों तक छिपे रहे। इससे पहले ACB ने 10 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जबकि कुछ फरार हैं और कुछ पर हाईकोर्ट से स्टे है। कुल 18 आरोपी बताए जा रहे हैं।

ACB का संदेश साफACB अधिकारियों ने कहा है कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूर्व IAS अधिकारी होने के बावजूद सुबोध अग्रवाल पर कार्रवाई से साफ है कि जांच एजेंसी किसी के चेहरे नहीं देख रही।

नोट: यह सभी आरोप जांच के अधीन हैं। अदालत अंतिम फैसला करेगी। सुबोध अग्रवाल ने पहले हाईकोर्ट में FIR रद्द करने की याचिका भी दायर की थी, लेकिन अब गिरफ्तारी के बाद मामला नया मोड़ ले चुका है

“लोकजनटुडे”


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