आदिगुरु शंकराचार्य ने उत्तरकाशी के खरसाली गाँव से किया शीतकालीन चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ!

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लोकजन टुडे ब्यूरो देहरादून

शीतकालीन चारधाम यात्रा का पावन आगाज़ श्रद्धा और उत्साह के साथ हो गया है। यमुनोत्री धाम की शीतकालीन यात्रा खरसाली गांव में विधिवत पूजा-अर्चना के पश्चात यात्रा का शुभारंभ किया गया। आज तड़के आदि गुरु शंकराचार्य की परंपरा को निर्वाह करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द ने खरसाली से यात्रा की शुरुआत की, जिसके बाद सौम्यकाशी उत्तरकाशी पहुंचे तो भक्तों ने पुष्प वर्षा कर उनका भावपूर्ण स्वागत और अभिनन्दन किया।

शंकराचार्य ने इस अवसर पर कहा, चारधाम की यह शीतकालीन यात्रा केवल पर्वतों की यात्रा नहीं है, यह आत्मा की यात्रा है। मां यमुना और मां गंगा के चरणों में पहुंचकर मनुष्य अपने भीतर की अशुद्धियों को त्याग कर पवित्रता, कर्तव्य और संवेदना के मार्ग पर आगे बढ़ता है। हिमालय की गोद में प्रवाहित यह आध्यात्मिक परंपरा सनातन धर्म की शक्ति और समाज के कल्याण का आधार है।

उन्होंने यह भी कहा कि सौम्यकाशी की यह धरती संत-परंपरा की तपोभूमि रही है, यहाँ आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु ईश्वरीय ऊर्जा का अनुभव अवश्य करता है।

शंकराचार्य आज काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करेंगे और भक्तों को आध्यात्मिक प्रवचन प्रदान करेंगे। मंदिर परिसर में तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है और श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ रहा है।
बाइट …स्वामी मुकुंदना नंद
ने बताया कि शीतकालीन चारधाम यात्रा के साथ काशी क्षेत्र में एक नई आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है।
उधर, शुक्रवार को मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा मुखीमठ में विशेष पूजा-अर्चना के साथ शीतकालीन यात्रा का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस दौरान क्षेत्रवासियों और तीर्थ पुरोहितों ने शीतकालीन प्रवास की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मां गंगा की डोली का गगनभेदी जयकारों के बीच पारंपरिक स्वागत किया। घाटी में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा वातावरण दिखाई दिया।
बाइट .. काशी विश्व नाथ पुजारी अजय पूरी ने बताया कि
शीतकालीन यात्रा न केवल आध्यात्मिक उत्सव है, बल्कि सीमांत पहाड़ी क्षेत्रों की संस्कृति, परंपरा और लोक विश्वास का जीवंत प्रतीक भी है। इस यात्रा से स्थानीय रोजगार, पर्यटन और व्यापार को भी गति मिलने की उम्मीद है ।

शीतकालीन यात्रा के पहले ही दिन सौम्यकाशी और पूरी यमुना–गंगा घाटी में आस्था का वातावरण चरम पर रहा। श्रद्धालु अगले दिनों तक जारी रहने वाले धार्मिक अनुष्ठानों, दर्शन, पूजन और प्रवचनों का लाभ लेने के लिए उत्साहित हैं।


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