क्या शासनादेश की जानकारी नहीं दी थी मुख्यमंत्री को?

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ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब सार्वजानिक रूप से मुख्यमंत्री को एक बड़ा फैसला लेना पड़ा और अपने ही विभागों के सचिवों को ये भी सन्देश दिया गया कि प्रदेश के हित में फैसलों को प्रमुखता से लिया जाएगा न कि अधिकारियो की मर्जी का ही अनुपालन होगा आखिर सवाल जस ता तस बना हुआ है कि क्या मुख्यमंत्री को भी कुछ नहीं समझते अधिकारी… आखिर क्यों मुख्यमंत्री को सार्वजानिक स्थल पर खंडन करना पड़ा..आपको बताते चले कि “लोकजन टुडे” ने इस खबर को सबसे पहले प्रमुखता से छापा था..

 

अब आपको वो शासनादेश की कॉपी दिखाते है जो कल देर शाम शासन से जारी हुई

और अब सुनिए मुख्यमंत्री की कड़ी प्रतिक्रिया जिसमे मुखिया ने सिरा से शासनादेश को नकार दिया

https://youtu.be/VUiKT8x-qfg

आखिर ऐसी नौबत आयी ही क्यों..आखिर भला जो पुलिसकर्मी २४ घंटे सड़क पर आंधी तूफ़ान की परवाह किये बगैर ड्यूटी बजाता है जिसकी सातो दिन २४ घंटे बिना किसी अवकाश के नौकरी होती है भला इनकी सैलरी में ही कटौती क्यों एक तरफ महंगाई आसमान छू रही है बढ़ाने से तो गए घटाने का बंदोबस्त कर दिया गया था आपको बताते चले कि “लोकजन टुडे” ने इस खबर को प्रमुखता से छापा था जिसका संज्ञान मुखिया ने लिया
और गनीमत रही कि समय रहते मुख्यमंत्री ने अपने ही विभाग की खबर का खंडन कर दिया


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