ऋषिकेश बीन नदी जान जोखिम में डालकर जोश-जोश में युवक कर गया पार लेकिन मौत से हुआ सामना तो फिर मनाने लगा खैर देखिए वीडियो…..

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ऋषिकेश

जब युवक डूबते हुए बच गया और उफनती बीन नदी से लगा माफ़ी माँगने! वीडियो हो रहा वायरल

 

एक युवक जोश में बीन नदी को पार करने जब कूद गया लेकिन जब तेज लहरों के थपेड़ों ने उसे यमराज के दर्शन कराने शुरू किए तो नदी पार करते ही खैर मनाने लगा और कान पकड़कर माफी मांगते हुए उठक बैठक करने लगा वीडियो से प्रतीत होता है कि युवक शायद नशे की हालत में नदी पार कर रहा था जोश में नदी के बीच में तो चला गया लेकिन जब तेज लहरों के थपेड़ों ने एहसास कराया कि अब यमलोक दूर नहीं तो सारा नशा उड़ गया जैसे तैसे युवक ने नदी पार की ओर भगवान का शुक्र मनाते हुए माफी मांगने लगा यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है बताया जा रहा है यह वीडियो ऋषिकेश बीन नदी का है हालांकि लोकजन टुडे वीडियो की पुष्टि नहीं करता लेकिन सोशल मीडिया में यह वीडियो ऋषिकेश का ही बताया जा रहा है ।

ऋषिकेश के बैराज-चीला मार्ग पर पड़ने वाली बीन नदी मानसून सीजन में हजारों लोगों के लिए परेशानी का सबब बन जाती है। लंबे समय से बीन नदी पर की जा रही पुल की मांग आज तक पूरी नहीं हो पाई। जिससे यमकेश्वर प्रखंड का डांडामंडल क्षेत्र तो बरसात के दिनों में राजधानी से अलग-थलग पड़ जाता है। खास कर तब लोगों के पास व्यवस्था को कोसने के सिवा कुछ नहीं बचता, जब डांडामंडल के गांवों से बीमार लोगों को चिकित्सालय पहुंचाना चुनौती साबित होता है।
बैराज-चीला मार्ग न सिर्फ ऋषिकेश और हरिद्वार के बीच का एक वैकल्पिक मार्ग है, बल्कि इस मार्ग पर यमकेश्वर प्रखंड के डांडामंडल के 82 गांवों की हजारों की आबादी भी जुड़ी हुई है। बैराज-चीला मार्ग पर पड़ने वाली बीन नदी इस मार्ग पर सबसे बड़ी बाधा है। बीन नदी यहां भूमिगत चीला शक्ति नहर के ऊपर से बहती है और बरसात में विकराल रूप धारण कर देती है। नदी का बहाव इतना तेज होता है कि यहां वाहन फंस जाते हैं। कई बार तो यहां यात्री बसें, दुपहिया और चौपहिया वाहनों में सवार लोगों की जान पर बन आई है। बीन नदी पर लंबे समय से पुल निर्माण की मांग की जा रही है। मगर, इस व्यवस्था की खामी ही कहेंगे कि कभी बजट के अभाव में तो कभी राजाजी पार्क के कायदे-कानूनों के चलते यहां पुल नहीं बन पाया है। बीन नदी पर पुल न होने का सबसे बड़ा खामियाजा डांडामंडल क्षेत्र के लोगों को उठाना पड़ता है। खासकर जब गांवों में लोग बीमार होते हैं या अन्य कोई आपात स्थिति आती है तो बीमारों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ऋषिकेश पहुंचाने में ग्रामीणों के पसीने छूट जाते हैं।

देखना होगा कब तक इतनी बड़ी आबादी को जो लंबे समय से पुल की मांग कर रही है उसे पूल नसीब हो पता है।


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