आईएएस और आईएफएस अधिकारी पर एक जैसे आरोप एक है जेल में दूसरा लगा है खेल में

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आईएएस और आई एफ एस अधिकारी पर एक जैसे आरोप

एक है जेल में दूसरा लगा है खेल में

एक खबर इन दिनों सचिवालय से लेकर सभी दफ्तरों में खूब चर्चाओं का मुद्दा बनी हुई है अधिकारी हो या कर्मचारी इस मामले को लेकर कानाफूसी चल रही है अब बिना आग लगे धुँआ तो उठता नहीं है बात उठी है तो अब दूर तलक जाएगी
उत्तराखंड में आय से अधिक संपत्ति के मामले में जहां एक आईएएस अधिकारी इन दिनों जेल में सलाखों के पीछे हैं वही आय से अधिक संपत्ति के मामले में दूसरा निलंबित आईएएस अधिकारी खुलेआम खेल करने में लगा हुआ है इन दिनों वह एक गुरु स्वामी जी के साथ सुबह से लेकर शाम दिन रात घूमते हुए देखा जा रहा  हैं गुरु स्वामी जी सीधा बड़े दरबार में अच्छी खासी दखल रखते हैं
सूत्रों के हवाले से खबर है कि निलंबित आईएएस अधिकारी के द्वारा जांच से बचने के लिए मोटे पैकेज में डील हो गई है हालांकि उनके ऊपर विजिलेंस जांच चल रही है और वह निलंबित भी हो चुके हैं इसी महीने 31 जुलाई को रिटायर हो रहे हैं वह इस जुगत में लगे हैं कि सम्मान पूर्वक विदाई हो जाए उड़ती उड़ती खबर है कि वह ऊपर लेवल तक सेटिंग रखने वाले स्वामी जी से डील कर चुके हैं आपको बता दें
विजिलेंस टीम ने आईएफएस  के खिलाफ तैयार की गई चार्जशीट में आरोप लगाया था कि  इन्होंने अपनी आय से 375 गुना ज्यादा संपत्ति अर्जित की है. यही नहीं, विजिलेंस ने 33 करोड़ की संपत्ति का खुलासा भी किया था. इस संपत्ति में  इस आई एफ एस अधिकारी की सात करोड़ की संपत्ति है, जबकि ज्यादातर संपत्ति परिजनों के नाम खरीदी गई है. भोगपुर में बेटे के नाम से अभिषेक स्टोन क्रशर लगाया गया है. पिरान कलियर में पत्नी के नाम से ब्रज इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल बनाया गया है. यही नहीं, स्कूल के लिए पत्नी के नाम पर ट्रस्ट बनाया गया है. अपने नाम संपत्ति खरीदने के लिए ट्रस्ट से लिए गए ऋण को अभी तक नहीं लौटाया है
ट्रस्ट में लोगों से बड़ी धनराशि जमा कराई गई है. साथ ही विजिलेंस ने चार्जशीट में जिक्र किया है कि हरिद्वार डीएफओ रहते हुए लैंसडाउन प्रभाग में लोगों को नौकरी देने की एवज में उनकी जमीनें आईएफएस  ने अपने नाम कराई हैं. इसके साथ ही देहरादून बसंत विहार में 2.40 करोड़ का मकान भी उन्होंने ख़रीदा है. मकान के लिए 60 लाख का ऋण स्कूल के ट्रस्ट से लिया गया है. पत्नी के खाते से 1.80 करोड़ लिए गए हैं. इस पैसे को एक दिन पहले अलग-अलग लोगों से जमा करवाया गया.
बड़ा सवाल यह है कि पिछले 3 महीने से भी अधिक का समय हो गया है जिस गति से जांच गतिमान है  लेकिन यह अधिकारी खुदको बचाने के लिए आजकल खेल करने में लगा हुआ है एक अधिकारी को जहां तेजी से जांच करते हुए सलाखों के पीछे डाल दिया है वहीं दूसरी तरफ उन्हीं आरोपों में एक अधिकारी खुला घूम रहा है फिलहाल तो यह अधिकारी हर तरफ मैनेजमेंट करने में जुट गया है अब देखना होगा गंभीर आरोपों में घिरे इस अधिकारी पर कार्यवाही कब तक हो पाती है क्योंकि खबर उड़ते उड़ते आई है इसके द्वारा अपने मामले को मैनेज कर लिया गया है लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है यह तो वक्त ही बताएगा यदि इस पर लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं होती है तो समझ लिया जाएगा मामला मैनेज है और यदि जल्द ही यह भी सलाखों के पीछे दिखाई दे तो फिर समझ लिया जाएगा खबर उड़ते उड़ते आई थी उड़ते उड़ते चली गई

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