देहरादून के इस अस्पताल में धड़ल्ले खरीदी जा रही सिटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड मशीन

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देहरादून: कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है , जिसको लेकर भारत सरकार द्वारा पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत कड़े प्राबधान भी किये गए है। इसके बाबजूद भी कुछ अस्पताल इस एक्ट को दरकिनार करते हुए धड़ल्ले से सिटी स्कैन मशीन हो या अल्ट्रासाउंड मशीन की खरीदारी कर काम कर रहे है।

ऐसा ही एक मामला राजधानी देहरादून का सामने आया जसमे पीसीपीएनडीटी से बिना परमीशन लिए ही जगदम्बा अस्पताल ने सीटी मशीन खरीदी जब शिकायत सीएमओ ऑफिस तक पहुची तो सीएमओ ऑफिस की पीएनडीटी की टीम ने छापा मारा लेकिन मशीन अस्पताल में नही मिली स्टाफ से पूछताछ करने पर पता चला मशीन को एक दूसरे अस्पताल पनासिया में शिफ्ट करवा दिया गया है। उसके बाद टीम उस अस्पताल पहुची जँहा पर मशीन को स्टॉल किया जा रहा था सीएमओ ऑफिस की पीएनडीटी टीम ने अस्पताल से मशीन को खरीदने व बेचने की परमीशन मांगी तो किसी भी अस्पताल के पास मशीन की परमीशन नही मिली जिसके बाद एक्ट के तहत मशीन को सीज कर दिया गया है।

वंही इस सम्बन्ध मर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ नरेन्द्र कुमार त्यागी ने बताया एक्ट के तहत जो भी कार्रवाई होनी चाहिए उसके अनुसार टीम द्वारा अभी मशीन को सीज किया गया है 48 घण्टे में एडवाइजरी कमेटी द्वारा आगे की कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।

आपको बता दे जिन अस्पतालों द्वारा पीएनडीटी एक्ट को ठेंगा दिखाते हुए राजधानी देहरादून में ही इस तरह का कृत्य किया जा रहा हो तो प्रदेश के अन्य जिलों में एक्ट कितना प्रभावी होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है , ओर रही बात इन अस्पतालों के इतिहास की बात तो इन अस्पतालों पर कई बार अनियमितताओं के आरोप लगे लेकिन प्रशासन द्वारा कार्रवाई के नाम पर नतीजा जीरो ही रहा, जँहा जगदम्बा अस्पताल का मालिक रसूखदार होने के कारण धड़ल्ले से नियम कानून को धता बता कर काम करता है वंही पनासिया अस्पताल की कहानी ऐसी है कि इस अस्पताल को खुले अभी लगभग डेढ़ या 2 साल का समय ही हुआ होगा और नाम बदल दिया इससे पहले इस अस्पताल का नाम एमसीसी हॉस्पिटल था।

राजधानी देहरादून में इस तरह के कई अस्पताल है जिन्हें नॉन मेडिको के द्वारा चलाया जाता है इनका मुख्य व्यापार जनता की सेवा के बजाय सरकारी अस्पतालों व एम्बुलेंस चालको की साँठ गाँठ से अपने यँहा मरीजों को लालच दे कर भर्ती करवाना और उसके बाद उनसे मोटी रकम वसूल करना रहता है, यह दोनों ही अस्पताल एक किराए की बिल्डिंग से संचालित हो रहे है इन दोनों के ही मालिक नॉन मेडिको है।


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