इस बार नाग पंचमी पर बन रहे प्रबल योग, कैसे करें भगवान शिव की पूजा,जाने नाग पंचमी से जुड़ी पौराणिक कथा…

सावन मास शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाया जाता है। इस दिन नाग-नागिन की पूजा का विधान है। मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन नाग-नागिन की पूजा करने से सालों भर विषैले जीव-जंतुओं के काटने का भय नहीं रहता है। साथ ही, पूजन से शनि, राहु पाप ग्रह के नकारात्मक प्रभाव से मुक्ति मिलती है। इस बार नाग पंचमी तिथि 25 जुलाई को है।

नाग-नागिन की पूजा से भगवान महादेव और…

ज्योतिष डॉ धीरेंद्र दुबे के अनुसार नाग-नागिन भगवान महादेव के सेवक हैं। आज के दिन नाग-नागिन की पूजा से भगवान महादेव और पार्वती का पूजन करें। महादेव का विधि-विधान पूर्वक रुद्राभिषेक करें। तत्पश्चात नाग-नागिन की मिट्टी की आकृति बनाकर दूध, लाबा, अक्षत आदि समर्पित कर। समस्त बाधाओं से मुक्ति के लिए प्रार्थना करें। जरूर लाभ मिलेगा।

पूजा के लिए शुभ मुहूर्त…

पंचमी तिथि आरंभ 24 जुलाई शायं 4.10 मिनट से 25 जुलाई को दोपहर 1.55 मिनट तक पूजा के लिए उत्तम काल: सुबह 7.03 मिनट से 9.17 मिनट तक और 11.29 बजे से 12.30 मिनट तक

नाग पंचमी का महत्व…

ज्योतिर्विद के अनुसार, दूध को चंद्रमा का प्रतीक माना गया है। इसके साथ ही भगवान शिव के मस्तक पर भी चंद्रमा विराजमान हैं। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक ग्रह बताया गया है। मन को शिव के प्रति समर्पण के उद्देश्य से भी नागपंचमी पर नाग को दूध पिलाया जाता है। नाग को शिव का सेवक भी कहा जाता है। नाग भगवान शिव के गले में विराजमान हैं। ऐसा माना जाता है कि नाग पृथ्वी को संतुलित करते हैं। ऐसे में उनकी उपासना का महत्व और भी बढ़ जाता है।

नाग पंचमी से जुड़ी पौराणिक कथा…

समुद्र मंथन से चौदह रत्नों में उच्चै:श्रवा नामक श्वेत अश्व रत्न प्राप्त किया गया था। उसे देखकर कश्यप मुनि की पत्नी कद्रू और विनता दोनों में अश्व के रत्न के संबंध में वाद विवाद हुआ। कद्रू ने कहा कि अश्व के केश श्याम वर्ण के हैं। यदि वह अपने कथन में असत्य सिद्ध हुईं तो वह विनता की दासी बन जाएंगी। कथन सत्य हुआ तो विनता उनकी दासी बनेंगी। कद्रू ने नागों को बाल के समान सूक्ष्म बनकर अश्व के शरीर में आवेष्ठित होने का आदेश दिया, लेकिन नागों ने असमर्थता प्रकट की। इस पर कद्रू ने क्रुद्ध होकर नागों को श्राप दिया कि पांडव वंश के राजा जनमेजय नाग यज्ञ करेंगे, उस यज्ञ में तुम सब जलकर भष्म हो जाओगे। श्राप से भयभीत नागों ने वासुकी के नेतृत्व में ब्रह्माजी से उपाय पूछा। भगवान ब्रह्मा ने कहा कि यायावर वंश में उत्पन्न तपस्वी जरत्कारू तुम्हारे बहनोई होंगे। उनका पुत्र आस्तीक तुम्हारी रक्षा करेगा। ब्रह्मा जी ने पंचमी तिथि को नागों को यह वरदान दिया तथा इसी तिथि पर आस्तीक मुनि ने नागों का परीरक्षण किया था। इसी दिन नाग पंचमी मनाई जाती है।


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