CBSE की फर्जी वेबसाइट द्वारा ठगे जा रहे छात्र और अभिभावक

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देहरादून : उत्तराखंड में वैसे तो कई किस्म की अपराध सामने आए है लेकिन आजकल अपराधियों द्वारा  एक नए तरीके से अभिभावकों को बेवकूफ बनाया जा रहा है। जी हां आजकल अपराधी  10वीं और 12वीं के छात्र और उनके अभिभावकों को CBSE के नाम से चल रही फर्जी वेबसाइट के द्वारा ठग रहे है।

इस फर्जी वेबसाइट द्वारा सीबीएसई की ओर से जारी सूचना में उनसे 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के लिए प्रवेश पत्र डाउनलोड करने के लिए पोर्टल पर कोई भुगतान नहीं करने का आग्रह किया गया है।

उन्होंने कहा कि फर्जी वेबसाइट cbsegovt.com पर छात्रों से पंजीकरण शुल्क मांगा जा रहा है। यह वेबसाइट सीबीएसई से संबद्ध नहीं है। सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in है। इस पोर्टल पर ही छात्रों को डेटशीट और प्रवेश पत्र सहित बोर्ड परीक्षाओं के बारे में सटीक जानकारी के लिए विजिट करना चाहिए।फर्जी शैक्षिक प्रणाम पत्र लगाने पर प्रधान पद का चुनाव न्यायालय ने किया निरस्त

विकासनगर के अंतर्गत ग्राम प्रधान के चुनाव में फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र लगाने के चलते न्यायालय विहित प्राधिकारी, सहायक कलेक्टर प्रथम श्रेणी विकासनगर ने ग्राम पंचायत ढकरानी के प्रधान पद के चुनाव को निरस्त कर दिया है।पंचायत की निर्वाचित प्रधान के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की प्रमाणिकता पर सवाल उठाने वाली याचिका की सुनवाई करते हुए उप जिलाधिकारी विनोद कुमार ने चुनाव को निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए। ग्राम पंचायत ढकरानी के प्रधान पद को लेकर विहित प्राधिकारी न्यायालय में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता संगीता के आरोपों को सही पाया गया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता रविंद्र सिंह लोगानी ने बताया कि जिस मदरसे के आठवीं के शैक्षिक प्रमाण पत्र नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान जहीरा खातून ने चुनाव में लगाए थे, उस मदरसे को मान्यता वर्ष 2010 में मिली थी, जबकि जहीरा ने वर्ष 1989 के प्रमाण पत्र जमा किए थे। वहीं, मदरसे को जूनियर हाई स्कूल की मान्यता आज तक नहीं मिली है।याचिकाकर्ता ने 2019 में चुनाव परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद ही न्यायालय विहित प्राधिकारी में याचिका दाखिल करते हुए निर्वाचित प्रधान जहीरा खातून के शैक्षिक प्रमाण पत्रों को फर्जी बताते हुए चुनाव निरस्त करने की मांग की थी।उन्होंने बताया कि इस संबंध में शिक्षा विभाग के माध्यम से हुई जांच में यह तथ्य सामने आया था कि जिस मदरसे से निर्वाचित प्रधान ने स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) प्राप्त किया है, उसे आठवीं तक कक्षा संचालन करने की मान्यता ही नहीं है।

इसके बाद उनके पक्ष से यह दलील दी गई कि उन्होंने अनौपचारिक शिक्षा के तहत पढ़ाई की है, लेकिन चुनाव के दौरान जिस अंक तालिका और टीसी का उन्होंने नामांकन के लिए प्रयोग किया, उसमें संस्थागत छात्रा के रूप में शिक्षा पाना अंकित किया गया था। न्यायालय ने शिक्षा विभाग की जांच, तमाम गवाह व सबूतों के आधार पर फैसला सुनाते हुए प्रधान पद के चुनाव को निरस्त कर दिया है।


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