सितारगंज से Zydus फूड प्रोडक्ट कंपनी बंद 1200 कर्मचारी सड़क पर मंत्री सौरव बहुगुणा के लिए परीक्षा की घड़ी

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सितारगंज में फूड प्रोडक्ट कंपनी जायडस का कारनामा रातों-रात चिपका दिया बंदी का नोटिस एक झटके में 12 सौ कर्मचारी आ गए सड़क पर

सितारगंज के विधायक वर्तमान में कौशल एवं सेवायोजन मंत्री सौरव बहुगुणा के लिए यह परीक्षा की घड़ी है विधानसभा क्षेत्र सितारगंज में प्रसिद्ध फूड प्रोडक्ट निर्माता कंपनी  जायडस एक झटके में 1200 कर्मचारियों को बेरोजगार बनाकर बंद कर दी गई है
90 फ़ीसदी कर्मचारी मंत्री सौरव बहुगुणा के विधानसभा क्षेत्र के बताए जा रहे हैं ऐसे में उनके विधानसभा क्षेत्र के निवासियों के लिए अब आखरी उम्मीद  उनके विधायक और मंत्री सौरभ बहुगुणा ही है
प्रसिद्ध फूड प्रोडक्ट निर्माता कंपनी जायडस कि सितारगंज यूनिट में ऐसा क्या हो गया कि रातों-रात प्रबंधन द्वारा फैक्ट्री को बंद करने का नोटिस चिपका दिया सुबह फैक्ट्री में जैसे ही कर्मचारी आए तो नोटिस चिपका देख सब के पैरों से जमीन खिसक गई कहा जा रहा है कि यह फैसला अचानक से लिया गया है ।
बिना किसी पूर्व नोटिस के रातों-रात प्रबंधन के बड़े कर्मचारी भाग गए हैं जिसके बाद से 12 सौ कर्मचारी फैक्ट्री के बाहर धरने पर बैठ गए हैं
आपको बता दें  Zydus Wellness  complan, Gulcon-D  और Cookies  का निर्माण करती है कितनी प्रतिष्ठित कंपनी के द्वारा ऐसा क्यों किया गया है यह समझ से परे है ऐसा धरने पर बैठे कर्मचारियों के द्वारा कहा गया है
Zydus Wellness के द्वारा दिया गया नोटिस
 कंपनी के द्वारा
 17 जून को एक नोटिस दिया गया है जिसमें कहा गया है कि सितारगंज यूनिट में बनाए जाने वाले उत्पाद को संपूर्ण भारत से कच्चा माल मंगाकर बनाया जाता है और उस तैयार उत्पाद का कुछ भाग उत्तराखंड व आसपास की मार्केट में बेचा जाता है परंतु अधिकांश उत्पाद को पूर्व एवं दक्षिण भारत के राज्यों में भेजा जाता है कोविड-19 के प्रभाव के कारण सितारगंज में उत्पादकों के उत्पादन की कीमत में लगातार बढ़ोतरी होने लगी है जो प्रबंधन के अथक प्रयासों के बाद भी किसी भी प्रकार से कम नहीं की जा चुकी है इसीलिए उत्पादकों में प्रयोग होने वाले कच्चे माल की कीमत बढ़ने एवं बाजार में कंपटीशन के चलते कंपनी को नुकसान होने के कारण इस यूनिट को बंद किया जाता है ऐसी दशा में प्रबंधन के पास काम कर रहे सभी कर्मचारियों और उनके सभी विधिक देय जिसमें बंदी मुआवजा भी सम्मिलित है उनके बैंक में खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं ।
हालांकि कंपनी के द्वारा तर्क दिया है गया है कि लगातार हो रहे नुकसान के कारण कंपनी को यह यूनिट बंद करनी पड़ रही है लेकिन अब ऐसे में 1200 कर्मचारी सड़क पर आ गए हैं उत्तराखंड सरकार क्या इस संबंध में संज्ञान लेकर कंपनी संचालक मैनेजिंग डायरेक्टर से वार्ता कर इन कर्मचारियों को बेरोजगार होने से बचा पाएगी क्योंकि लगातार उत्तराखंड से कई प्रतिष्ठित संस्थान या तो बंद हो चुके हैं या बंदी की कगार पर है

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