सुशासन की दिशा में ऐतिहासिक कदम: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘देवभूमि परिवार पोर्टल’ का किया शुभारंभ; हर परिवार को मिलेगी एकीकृत पहचान !

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लोकजन टुडे, देहरादून

देहरादून:उत्तराखंड के लोकप्रिय एवं यशस्वी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में जन-कल्याण और पारदर्शी शासन को नए आयाम देते हुए एक ऐतिहासिक पहल करते हुए आज राज्य के नागरिकों की सुविधा और सरकारी योजनाओं को सहज बनाने के लिए ‘देवभूमि परिवार पोर्टल’ का शुभारंभ किया। इस क्रांतिकारी कदम के साथ ही अब उत्तराखंड के हर परिवार का एक एकीकृत और पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया का भव्य शुभारंभ हो गया है।

एक परिवार, एक पहचान, एक प्लेटफॉर्म’ का विज़न

1. क्या है ‘देवभूमि परिवार पोर्टल’ और आईडी?

■ यूनिक फैमिली आईडी: इस पोर्टल के तहत उत्तराखंड के प्रत्येक पात्र परिवार को एक विशिष्ट ‘देवभूमि परिवार आईडी’ (Family ID) प्रदान की जाएगी।

■ ​सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस: राज्य के सभी विभागों का अलग-अलग लाभार्थी डेटाबेस खत्म कर एक केंद्रीयकृत डेटाबेस (Centralized Database) तैयार किया जा रहा है।

■ ​पात्रता: यह पहचान पत्र मुख्य रूप से उत्तराखंड में 15 वर्षों से रह रहे स्थायी निवासियों को जारी किया जा रहा है।

2. महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता​

विधेयक और पोर्टल के प्रावधानों के अनुसार, परिवार की पहचान और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में मातृशक्ति को प्रमुख स्थान दिया गया है:

■ परिवार में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की सबसे वरिष्ठ महिला सदस्य को ही परिवार का मुखिया घोषित किया जाएगा।

​3. प्रमुख लाभ और विशेषताएं​

कागजी कार्रवाई और भौतिक सत्यापन से मुक्ति: एक बार डेटा सत्यापित होने के बाद नागरिकों को अलग-अलग योजनाओं के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने और बार-बार दस्तावेज जमा कराने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। ​

फर्जीवाड़े और डुप्लीकेसी पर रोक: कई योजनाओं में एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार लाभ लेने या फर्जी लाभार्थियों की समस्या पर लगाम लगेगी। ​

पारदर्शिता और त्वरित लाभ: बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और अंतिम छोर पर खड़े पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं (राशन, स्वास्थ्य, छात्रवृत्ति, पेंशन आदि) का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचेगा।

​शहरी परिवारों की मैपिंग: ग्रामीण क्षेत्रों की तरह जिन शहरी परिवारों के पास परिवार रजिस्टर नहीं था, वे भी अब इसके तहत आ सकेंगे।

4. डेटा सुरक्षा और कड़े कानून

■ ​डेटा को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDP Act) के तहत पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा। ​

■ यदि कोई इस डेटाबेस में अवैध रूप से सेंधमारी (Data Hack) करने का प्रयास करता है, तो 10 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का कड़ा कानूनी प्रावधान है।

मुख्यमंत्री का संदेश: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कदम को राज्य में ‘सुशासन की दिशा में मील का पत्थर’ बताया है। उनका कहना है कि इससे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि राज्य के संसाधनों का दुरुपयोग रुकेगा और डेमोग्राफिक व सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा में भी मदद मिलेगी।


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